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बालात्कार के संगीन आरोपो मे घिरे संत श्री आसाराम

संत आसाराम बापू

संत आसाराम बापू

संसारिक मोह-माया से कोसो दुर भगवान की भक्ति मे विलीन व्यक्ति को हि संत कहा जाता है। संत लौकिक सुख-दुख का परित्याग कर भवसागर को पार करने के लिए सदा प्रयत्न करता रहता है। मुक्ति ही संत का एकमात्र लक्ष्य होता है। परन्तु हमारे कुछ संत इस परिभाषा के आस-पास भी नही भटकते। यहाँ मैं उन संतो का जिक्र कर रहा हुँ, जो बडे-बडे फाइव-स्टार पंडालो मे सत्संग करते है। ये संत वातानूकुलित वाहनो मे सफर करते है। होटलो मे ठहरते है। सत्संग पर पानी की तरह पैसा बहाते है। छप्पन भोग का सेवन करते है। फिर भी खुद को सीना ठोककर संत कहते है।

रविशंकर, सत्य साँई, आसाराम, बाबा रामदेव और ना जाने कितने ही संत है जो कहने को तो संत है। पर साथ ही करोड़ो की संपत्ति के मालिक और संसारिक मोह-माया में लिप्त है।

उल्लेखित सभी संतो मे से संत आसाराम का नाम इन दिनो की गरम मसालेदार सुर्खियो मे छाया हुआ है। भगवान के दूत कहे जाने वाले संत पर बलात्कार का सनसनीखेज आरोप हैरान करने वाला है। हैरानियत इस बात की कि कोइ संत इतना कैसे गिर सकता है। यकिन नही होता कि यह वही आसाराम है जो सिद्धि प्राप्ति के समय अपनी पत्नी से भीक्षा माँगते वक्त उसे भी माता कहकर संबोधित करता था। और आज उसी संत पर इतना संगीन आरोप लगा है। संत के लिए तो हर स्त्री माँ होती है। फिर इस संत को क्या हुआ।

संत आसाराम का ये कोई पहला विवाद नही है। इससे पहले भी आसाराम बापू कई विवादो के कारण छाये रहे है। चाहे वो फरवरी 2013 मे करीबी शिष्य 23 वर्षीय राहुल पचौरी की मौत का मामला हो या जुलाइ 2008 मे अहदाबाद स्थित आश्रम मे दो बच्चो की संदिग्ध मौत का मामला हो। आसाराम हर बार इन आरोपो के जंजाल से बच निकलते है। साथ ही आसाराम पर देश के अलग-अलग हिस्सो मे जमीन के आरोप भी लगे। अहमदाबाद, सूरत, दिल्ली, रतलाम, गुढ़गाँव और राजकोट, इन सभी जगहो पर आसाराम पर पर जमीन हडपने का आरोप लगा था। रतलाम मे आश्रम को लम्बे मुकदमे के बाद जमीन खाली करनी पडी थी। 2008 में बिहार स्टेट बोर्ड ऑफ रिलीजियस ट्रस्ट ने आसाराम के ट्रस्ट को अपनी 80 करोड़ रुपये की जमीन कब्जाने पर नोटिस दिया था। एक बार तो एक भक्त ने आसाराम के कार्यक्रम मे मशीन से टाफियो की बौछार के कारण अपनी आँख फूटने का आरोप लगाया था।

आसाराम पर लगे सभी आरोपो मे सबसे संगीन आरोप हाल ही जोधपुर आश्रम मे बलात्कार का आरोप है। 16 वर्षीय इस नाबालिग लडकी के दावे मे कितनी सच्चाइ है ये तो वक्त ही बता पायेगा। स्वामी सच्चिदानंद पर भी यह आरोप लगा था लेकिन कानूनी कार्रवाही मे वो पाक-साफ निकले थे। पर अहम बात यह है कि सिद्दी पा चुका कोई संत इतना कैसे गिर सकता है।

आसुमल से आसाराम तक का सफर तय करने के बाद क्यो आसाराम के पैर लडखडा गये। बचपन से ही आध्यात्म की ओर झुकाव होने के कारण आसाराम सदैव संसारिक मोह-माया से दुर रहे। माँ ने विवाह का प्रस्ताव रखा तो आसुमल ने मना कर दिया। ब्रह्मचर्य पर खतरा होते हुए भी जबरदस्ती विवाह करना ही पडा। पर सिद्दी की चाह ने हमेशा आसाराम को निरन्तर प्रभु की ओर प्रेरित किया। सिद्दी प्राप्त भी हुइ, अपार श्रद्दा के साथ भक्ति करना कोइ असान काम नही था। गुरू ने आसाराम नाम दिया था। उन्ही के कहे अनुसार जंगल मे घोर तपस्या और अटुट विश्वास के बलबुते सिद्दी को पा लिया। लेकिन गलती इस सिद्दी को ना संभालने पर हुइ।

धन अच्छे से अच्छे का इमान हिला देता है। ऐसा ही कुछ आसाराम बापू के साथ भी हुआ, सिद्दी प्राप्ति के बाद सात साल एकान्तवास मे दिशा, हिमालय, नरेश्वर धाम, माउंट आबु और ना जाने कहा-कहा घुमते रहे, बाद मे गुरू के कहने पर आसाराम अहमदाबाद मे साबरमती के किनारे कुटिया डालकर रहने लगे। संत का नाम सुनकर भक्त आप ही आकर्षित हुए चले आए। धीरे-धीरे भक्तो ने कुटिया को पक्के मकान मे तब्दील किया। आसाराम अगर यहीं रूक जाते तो शायद स्थिति अलग होती। फिर क्या भक्त बढे और धीरे-धीरे अहदाबाद का वो साबरसती नदी का किनारा लम्बे-चौडे क्षेत्र मे फैले एक आश्रम मे बदल गया। फिर आसाराम का साम्रज्य फैलता गया। जहाँ-जहाँ आसाराम जाते जनता खिंची चली आती। एक से दो और फिर बढते-बढते आज पूरे देश मे आसाराम के चार सौ से ज्यादा आश्रम है। आश्रमो को दान मे भारी भरकम राशि मिलती है। जन-कल्याण का राग अलापने वाले संत आसाराम ने कितना जन कल्याण किया ये तो पता नही लेकिन कोयला और लकडी बेचने वाले के पुत्र आसाराम ने अपना कल्याण जरूर किया।

अपार धन, चार सौ से ज्यादा आश्रम इतना सब देखने का बाद आसाराम का मन डोलना ही था। संत की पदवी पर विराजित आसाराम सिद्दी से प्राप्त शक्ति को सम्भाल ही नही पाये। चरित्र से लेकर व्यवहार मे भी पुंजीपति होने का अभिमान छलकने लगा। संत का स्वभाव शांत और कोमल होता है, लेकिन इस के उलट आसाराम गुस्सैल और बेहद कठोर स्वभाव का परिचय देते रहे है। चाहे बुजुर्ग को लात मारना हो या पत्रकार को तमाचा मारना हो आसाराम ने संत होने के सभी गुणो को झुठलाया है। और अब अपनी बेटी के समान 16 वर्षीय लडकी से रेप ने आसाराम की शख्सियत को तार-तार कर दिया है।

आसाराम समर्थक जहाँ इस आरोप को सिरे से खारिज कर रहे है तो आसाराम खुद इसे बडी साजिश करार दे रहे है। जो भी हो आसाराम मे विश्वास रखने वालो को आरोप सिद्द होने पर ही यकिन होगा। साथ ही आसाराम का विरोध भी पूरे देश मे जोर-शोर से हो रहा है। आसाराम की विश्वसनीयता अभी से गिरने लगी है। फिलहाल आसाराम के भविष्य का जिम्मा कानुन-व्यवस्था पर छोड देना ही उचित होगा। कानुन पर हमे विश्वास करना ही होगा।

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