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5 मजबूत संकेत: बीजेपी के पाले में आएगी टीम अन्ना

टीम अन्ना

टीम अन्ना

भ्रष्टाचार के खिलाफ जनांदोलन चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनके सहयोगी बीजेपी के समर्थन में आगे आ सकते हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि हाल के दिनों में घटनाक्रम और राजनीतिक दलों को लेकर अन्ना हजारे के रुख में तेजी से बदलाव आ रहा है।

अन्ना हजारे अब तक यही कहते रहे हैं कि वे किसी राजनीति दल का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं। अन्ना कहते रहे हैं कि किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति उनके साथ नहीं रह सकता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में अन्ना हजारे और उनकी टीम के रुख में बदलाव दिख रहा है। ये बदलाव इस बात की तरफ साफ इशारा करते हैं कि अन्ना हजारे और उनके कुछ सहयोगी बीजेपी के समर्थन में खुलकर सामने आ सकते हैं।

अन्ना हजारे के सचिव ने केजरीवाल को लेकर कहा, ‘अन्ना अरविंद से बहुत नाराज हैं। अन्ना का कहना है कि अगर दिल्ली के मुख्यमंत्री उनसे मिलने भी आते हैं तो भी वह उनसे बात नहीं करेंगे। अन्ना ने किरण बेदी और अन्य साथियों से इस बारे में पिछले महीने अपने गांव रालेगण सिद्धि में चर्चा की थी।’ बेदी ने केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा है, ‘भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के निशाने पर रही कांग्रेस को आम आदमी पार्टी पिछले दरवाजे से सत्ता में पहुंचा देगी।’ बेदी के बदले रुख और उन्हें अन्ना से मिल रहे समर्थन को कई लोग केजरीवाल से हजारे की नाराजगी से जोड़कर देख रहे हैं।

बदला अन्ना का स्टैंड, कहा-उनके साथ के लोग लड़ सकते हैं चुनाव

अन्ना हजारे यह कहते रहे हैं कि वे किसी पार्टी का समर्थन नहीं करेंगे। अन्ना कहते रहे हैं कि राजनीति एक गंदगी है, जिसमें उतरने से व्यक्ति गंदा हो जाता है। लेकिन हाल के कुछ दिनों में राजनीतिक दल को लेकर उनके रुख में नरमी आती दिख रही है। अन्ना हजारे ने अपनी भरोसेमंद सहयोगी किरण बेदी को आशीर्वाद देते हुए कहा है कि अगर वे चाहें तो चुनाव लड़ सकती हैं। अन्ना हजारे के सचिव के मुताबिक, ‘अन्ना ने कहा है कि वे किसी पार्टी का खुलकर समर्थन या प्रचार नहीं करेंगे लेकिन अगर उनकी टीम का कोई सदस्य चुनाव में हिस्सा लेता है तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है। किरण बेदी ने अन्ना हजारे से चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जाहिर की है। अन्ना ने कहा है कि उन्हें इसमें कोई दिक्कत नहीं है।’ इससे पहले अन्ना की टीम के अहम सदस्य जनरल वीके सिंह ने जब मोदी के साथ एक चुनावी संभा में मंच साझा किया था तब अन्ना उनसे नाराज हो गए थे। लेकिन अब उन्हें किरण बेदी के बीजेपी का समर्थन करने पर कोई एतराज नहीं है। यह उनके स्टैंड में बड़ा बदलाव है जो इस बात की पुख्ता संकेत है कि अगर अन्ना नहीं तो उनकी टीम के कई सदस्य बीजेपी के पाले में जा सकते हैं।

अन्ना हजारे और बीजेपी की ‘जुगलबंदी’

इनदिनों बीजेपी और अन्ना हजारे के बीच अच्छी ‘जुगलबंदी’ चल रही है। दोनों एक दूसरे से मदद मांग रहे हैं। कुछ दिनों पहले अन्ना ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को चिट्ठी लिखकर गुड़गांव में अपनी मूर्ति लगवाने में मदद मांगी थी। अब अन्ना के सचिव ने खुलासा किया है कि पिछले कुछ दिनों से बीजेपी के कुछ नेता अन्ना हजारे से फोन पर बात कर रहे हैं। अन्ना के सचिव के मुताबिक बीजेपी नेता चाहते हैं कि अन्ना हजारे पार्टी का समर्थन करें।

किरण बेदी ने कहा, मेरा वोट मोदी को

पूर्व आईपीएस अफसर और टीम अन्ना की अहम सहयोगी किरण बेदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के समर्थन में खुलकर आ गई हैं। गुरुवार रात उन्होंने ट्वीट किया, ‘मेरा वोट नरेंद्र मोदी को। वे ही देश को स्थायी सरकार दे सकते हैं।’ बेदी ने ट्वीट किया था, ‘मैं ऐसे व्यक्ति की तलाश में हूं जो देश और पार्टी का नेतृत्व कर सके। जो स्थायित्व दे सके। मजबूत और स्थायी सरकार के लिए मेरा सपोर्ट मोदी को। मेरे लिए इंडिया फर्स्ट! स्थिर, सुशासित, जवाबदेह और इनक्लूजिव। एक स्वतंत्र वोटर के तौर पर मेरा वोट नमो (नरेंद्र मोदी) को।’ उन्होंने अपने बयान को शुक्रवार को जायज भी ठहराया। बेदी ने कहा, ‘मैं किसी पार्टी की सदस्य नहीं हूं। मैं एक मजबूत, स्पष्ट और आजाद नागरिक की आवाज के तौर पर यह कह रही हूं।’ बेदी ने इससे पहले अक्टूबर में कहा था, ‘गुजरात में उन्होंने (मोदी) ने बहुत विकास किया है। उनका नामांकन (भाजपा के प्रधानमंत्री प्रत्याशी के तौर पर) वोटरों को पसंद तय करने में मदद करेगा।’ तब बीजेपी ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया था। बेदी के गुरुवार के ट्वीट के बाद बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी सामने आए। उन्होंने कहा कि बेदी को पार्टी में शामिल होने का न्योता भेजा जाना चाहिए।

सिंह रेवाड़ी की रैली में मोदी के साथ कर चुके हैं मंच साझा वीके
सिंह

सेना के पूर्व प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह की नरेंद्र मोदी से नजदीकी का खुलासा पिछले साल सितंबर में तब हुआ जब हरियाणा के रेवाड़ी में पूर्व सैनिक रैली में दोनों ने मंच साझा किया था। इस रैली में दोनों नेताओं एक-दूसरे के बारे में सार्वजनिक तौर पर तो ज्यादा नहीं बोला था, लेकिन दोनों मंच पर आपस में खूब बातचीत करते हुए देखे गए थे। इस रैली के बाद से यह अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि वीके सिंह बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने वीके सिंह को भी पार्टी में शामिल करने के लिए न्योता भेजने की बात कही है।

लोकपाल कानून के वजूद में आने का श्रेय बीजेपी ने अन्ना को दिया

भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल जैसा कानून बनवाने में अन्ना हजारे के जनांदोलन के योगदान को कौन भूल सकता है? अन्ना और उनके साथियों ने अनशन और विरोध प्रदर्शन के जरिए सरकार पर जबर्दस्त दबाव बनाया था। 2013 के आखिर में संसद ने लोकपाल बिल को मंजूरी दी। केंद्र सरकार ने लोकपाल बिल को पास करने का श्रेय अन्ना को तो दिया लेकिन उसे अपनी उपलब्धि के तौर पर भी पेश किया। कांग्रेस की विरोधी बीजेपी ने संसद में लोकपाल बिल को मंजूरी मिलने का पूरा श्रेय अन्ना हजारे को दिया। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज से लेकर पार्टी के कई प्रवक्ता भी लोकपाल कानून का ‘क्रेडिट’ अन्ना को देते हैं। कई जानकार इसे बीजेपी की अन्ना को करीब लाने की मजबूत कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

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