सामग्री पर जाएं
Advertisements

किला-ए-दिल्ली की जंग (लोकसभा चुनाव 2014)

किला-ए-दिल्ली की जंग

किला-ए-दिल्ली की जंग

 

सियासी तापमान इन दिनो काफी बढ़ा हुुआ है। थोक में बयानो की बौछार हो रही है। किसी बयान मे सियासी वादा होता है तो किसी मे विरोधी के लिए तंज कसे जाते है। मोदी सियासी ट्रेंडिंग मे सबसे ऊपर चल रहे है। लोकसभा चुनाव की डिफेंडिंग चैम्पियन कांग्रेस पार्टी भी पूरी ताकत लगा कर मोदी की मिट्टी पलीत करने की पूरजोर कोशिश कर रही है। ऊपर से कवाब मे हड्डी बने केजरीवाल भी सियासत मौजूदा ट्रेंड को ही बदलने की कसम खाकर दिल्ली के धाकड़ खिलाडियों की नाक में दम करे बैठे है। वही क्षेत्रीय दलों ने भी शाम दाम दंड भेद की नीति के साथ सारा जोर लगा रखा है कि किसी तरह भाजपा और कांग्रेस दोनो को सत्ता के संग्राम मे पटखनी दी जाए।

अगले पाँच साल के लिए देश का रहनुमा चुनने के लिए हो रहे इस ताम-झाम से लोकतंत्र जीवित हो उठा है। वरना तो पिछले पाँच साल से लोकशाही गहन निद्रा मे जा चुकी थी। पिछले पाँच साल की ही बात नहीं है ये असल मे लोकतंत्र महज चुनाव के चंद दिनो की शो है। शो खतम पैसा हजम फिर अगले चुनाव की तैयारी। कोई भी दल जितना पैसा पाँच साल में कमाता है वो इस महापर्व मे लगा देता है। फिर अगले पाँच साल फिर से धन जुुटाने की कोशिश मे लगा रहता है। घोटाले, दलाली, रिश्वत, लुट-घसोट और हेरा-फेरी जो भी हथकंडा अपनाने का मौका हाथ लगता है वो इस्तेमाल करता है। और कुछ इस तरह लोकतंत्र की गाड़ी बिना किसी रोकटोक के लोगो को कुचलते हुुए बढ़ती चली जाती है।

2014 लोकसभा चुनाव ऐसे लोकतंत्र को बदलने का एक और सुनहरा अवसर है। लेकिन जातीवाद, समाजवाद, संप्रदायवाद और पूंजीवाद के मकड़जाल मे फंसे भारत के लोग इन सब से चाहकर भी बाहर नही आ पाते। जनता को सही गलत का अंतर पता होते हुए भी भेड़चाल की जैसे लत सी लग गयी है। ये बेड़ियाँ जो जनता के पैरो में पड़ी है लोकतंत्र को भी अपने लपेटे मे ले रही है। हर चुनाव मे हम लोग सोचते है इस बार ऐसी सरकार बननी चाहिए जो पिछले पाँच साल की निराशा को कोसो दूर कर देें। लेकिन हर बार हम सिर्फ सोचते रह जाते है और हालत सुधरने की जगह और बिगड़ती चली जाती है।

जनता भी बेचारी क्या करें कोई राजनीति में समाज सेवा करने तो आता नहीं है, चुनाव मे अच्छा खासा खर्चा करना पड़ता है। खून पसीना बहाना पड़ता है तब जाकर कही जीत नसीब होती है। राजनीति एक धंधा बन चुकी है और चुनाव महज लोकतंत्र की एक औपचारिकता। हर राजनीतिक दल जब अस्तित्व मे आता है तो वो जनता का हिरो होता है लेकिन जैसे ही सत्ता का छप्पन भोग उसके मुँह लगता है वो जनता के लिए खलनायक बन जाता है। कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, अन्नाद्रमुक और हाल ही में जबरदस्त अंदाज मे पदार्पण करने वाली आम आदमी पार्टी, ये सभी शुरू मे हिरो थे और बाद मे जीरो हो गये। विकल्प की भरमार तो है लेकिन सही विकल्प मौजूद नहीं है।

खैर सत्ता तो शायद यूं ही मैली गंगा की तरह अपवित्र ही रहेगी लेकिन इस बार का लोकसभा चुनाव कुछ खास जरूर है। सोशल मीडिया, तमाम समाचार चैनलों और अखबारों ने इस लड़ाई को बेहद दिलचस्प रूख दे दिया है। अब नेताओ के भाषण सिर्फ जनता तक पँहुचते ही नहीं बल्कि जनता की प्रतिक्रिया भी नेताओं तक सोशल मीडिया के माध्यम से नेताओ तक पहुँच रही है।

देश में भाजपा मोदी लहर होने का दावा ठोक रही है। कांग्रेस पूरे राष्ट्र को 10 साल के अपने काम की दुहाई देकर वोट पाने की पूरजोर कोशिश कर रही है। बाकी क्षेत्रीय दल अपने राज्य मे किये गये अपने काम के जरिए लोकसभा में अपनी हिस्सेदारी की माँग कर रही है। तीसरा मोर्चा बन ठनकर तैयार होने को उत्सुक है। युवा नेता पहली बार लोकसभा के सदस्य बनने को उतावले है तो बुजूर्ग नेताओं के सामने अपनी साख बचाने की चुनौती है।

2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सफाया तो पक्का है, जनता का महंगाई, भ्रष्टाचार पर सारा गुस्सा कांग्रेस पर फूटना तो वाजिब है। लेकिन अगले पाँच साल की तस्वीर क्या होगी इसके लिए जनता के पत्ते 16 मई को ही खोलेंगे। इस बार अगर बहूमत की कोई सरकार आयी फिर तो देश की स्थिति सुधरने की आश लगायी जा सकती है। वरना तो खिचड़ी सरकार में जनता की ही मिट्टी पलीत होती है हम ना घर के रहते ना घाट के। आशा है देश की जनता क्षेत्रीय दलों को ताकत देने की बजाय किसी एक राष्ट्रिय दल के हाथ मजबूत करेगी।

दिल्ली के किले पर इस बार फहरायेगी लोकतंत्र की पताका या फिर से सड़ी गली राजनीति घोल देगी लोकतंत्र के रंग मे भंग। 2014 का चुनाव देश के सम्मान का चुनाव है, देश के भविष्य का चुनाव है। अपना वोट सही व्यक्ति और सही दल को दें ताकि लोकतंत्र मजबूत हो। वोट करें ताकि भारत संवर सके। वोट करे ताकि हमारा भारत दुनिया मे सर उठा सके।

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s

%d bloggers like this: