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16 तारिख- लोकतंत्र के महापर्व का ग्रेंड समापन

महापर्व का ग्रेंड समापन

महापर्व का ग्रेंड समापन

लोकतंत्र का महापर्व अपने पूरे रूबाब पर है। 10 चरणों की वोटिंग में इनक्रेडिबल इंडिया ने अपने नए सेवक को चुन लिया है। जनता के स्याही वाली उंगली से होता हुए लगभग 8000 उम्मीदवारों की किस्मत कल 16 मई को ईवीएम के पिटारे से निकलेगी। 543 लोगों की अच्छी किस्मत तो बाकी की बुरी किस्मत।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के इस पर्व ने कांग्रेस रूपी खलनायक से जुड़ी यादो को जैसे छूमंतर कर दिया है। कल का दिन उल्लास से भरा होगा, देश की जनता नतीजों मे अपनी भागीदारी तलाश रही होगी तो नेता जनता के रूख से दो-चार होते नजर आयेंगे। सभी सीटों के डिफेंडिंग चैंपियन साँस थामे फिर से जनता के लाड़ प्यार को तरस रहे होंगे तो चुनौती देने वाले उम्मीदवार संसद मे अपनी सीट पक्की होने के लालच के साथ बेसब्री से नतीजों के अपने पक्ष होने की प्रार्थना कर रहे होंगे।

पिछले दस साल देश पर राज करने वाले यूपीए गठबंधन के कर्मो को देखे तो ज्यादातर डिफेंडिग चैंपियन इस बार अपनी सीट डिफेंड करने मे असफल होते दिख रहे है। और इस उल्टी हवा का फायदा मिलेगा इस डूबते जहाज से अलग रहने वाले दलों को.. कांग्रेस के सहयोगी कल के नतीजों के अंजाम को सोचकर सर पीट रहे होंगे तो कांग्रेस ने भी अपने प्रधानमंत्री को फेयरवेल पार्टी देकर हार को भी सेलिब्रेट करने का जज्बा पूरे देश को दिखा दिया है।

लोकसभा चुनाव -2014 का अंतिम वोट पड़ते ही तमाम मीडिया चैनलों ने एग्जिट पोल का पिटारा खोल दिया। जैसा कि मोदी साहब की लहर की ब्रांडींग करने वाले मीडिया के पोल का अंदाजा पहले से ही लगा लिया गया था कि ये मोदी के ही नाम होंगे। हुआ भी कुछ यूं ही, पिछले तीन बार के एग्जिट पोल की तरह इस बार भी मिडिया ने मोदी के नाम पर मोहर लगा दी। और ताज्जूब की बात ये रही कि सारे एग्जिट पोल कांग्रेस के खात्मे की ओर इशारा कर रहे है। और सत्ताधारी यूपीए गठबंधन से ज्यादा अन्य की श्रेणी मे आने वाले दलों पर ज्यादा मेहरबान है।

देश के गुस्से को चावल बिनने की तरह दिखाकर मिडिया ने थोड़ा बहुत आइडिया जरूर दे दिया है। लेकिन पिछले दो बार के एग्जिट पोल के फ्लॉप शो, और उसमें से भी 2004 के एग्जिट पोल के बाद शक जरूर हो रहा है। कांग्रेस के पाप-राज से बचने के लिए भगवान-अल्लाह-गौड सब से दुआ जरूर करूंगा कि जीत भाजपा की ही हो।

भाजपा की जीत जरूरी है क्योंकि कांग्रेस को अगर किसी आज तक कड़ी टक्कर दी है तो वो वहीं है। और स्थिरता के लिए भी भारतीय जनता पार्टी का जीतना जरूरी है ताकि देश में पहली गैर-कांग्रेस सरकार पूरे पाँच साल चलाने के कारनामे को वो फिर से दोहरा सके। तीसरा मोर्चा जीता तो देश को बस इस क्षेत्रीय दलों के गुछ्छे को बस झेलना ही पड़ेगा।

कल देश के लिए कांग्रेस मुक्ति का दिन है साथ ही नयी सरकार, नये प्रधानमंत्री के बारे में पता लगने का दिन है। 16 मई इतिहास स्वर्णिम अक्षरों मे लिखी जायेगी अगर आने वाली सरकार देश की जनता को मालिक और खुद को सेवक समझकर देश की किस्मत और हालत को बदल देगा।

अबकी बार मोदी सरकार……………………..

 

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