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आ गयी बहुमत वाली मोदी सरकार…

जीतने के बाद दिल्ली मे रोड़ शो करते मोदी

जीतने के बाद दिल्ली मे रोड़ शो करते मोदी

2014 लोकसभा चुनाव के नतीजो ने सच में देश की राजनीति को बदल कर रख दिया। जात-पात, धर्म-संप्रदाय और यहाँ तक की विरासत की राजनीति भी धरी की धरी रह गयी। महज छह राज्यों की सत्ता तक सिमटी भारतीय जनता पार्टी लोकसभा के चुनाव मे पूरे भारत में छा गयी। नरेंद्र मोदी इस चुनाव मे लोकप्रियता के शिखर पर पहुँच गये। पूर भारत ने इंदिरा गांधी के बाद किसी नेता इतनी लोकप्रियता से नवाजा। कांग्रेस का सफाया तो हुआ ही साथ में अपने क्षेत्र में ताकतवर क्षेत्रीय दल भी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लहर में किनारे लग गये। हिन्दुत्व की ताकत और साथ ही गुजरात विकास मॉडल के सहारे मोदी ने अभुतपूर्व जीत दर्ज की।

2013 के दिल्ली चुनावो में एक इतिहास अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने 28 सीट जीत कर और फिर पहली चुनाव के बाद सरकार बनाकर बनाया था। राजनीति में ईमानदार और साफ-छवि के लोगों की वकालत करते हुए आम आदमी पार्टी ने भारतीय राजनीति के लिए एक नया ट्रेंड शुरू किया। लेकिन 2014 के चुनाव में आप को भी भाजपा नें जोरदार झटका दिया। अपने ही गढ़ दिल्ली मे आप को सातों सीटो पर हार देखनी पड़ी। भारतीय जनता पार्टी ने आम चुनाव मे आप की जगह ली और देश के सारे सियासी समीकरणों को चीरते हुए दिल्ली की सत्ता की चौखट तक जा पहुँची। भाजपा ने आम चुनाव 2014 में 282 सीट जीतकर तहलका मचा दिया। 272+ को अपने अभियान को अंजाम देते हुए मोदी ने भाजपा को अकेले बहुमत दिला दिया है।

भारत की राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार पूरे पाँच साल गैर-कांग्रेसी सरकार चलाकर का एक इतिहास रचा था। अब 2014 के चुनाव को ऐतिहासिक बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र मोदी ने फिर से इतिहास रच दिया है। ये भारत की राजनीति मे पहली बार है कि कांग्रेस के अलावा किसी और दल को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है। 272 का आंकड़ा बहुमत के लिए जरूरी होता है और मोदी ने 282 सीटें जीतकर भारत की राजनीति को अगले पाँच साल के लिए जोड़ तोड़ की राजनीति से दूर कर दिया है।

उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम इस बार भाजपा को मोदी लहर का जबरदस्त फायदा मिला है। कांग्रेस को इतिहास की सबसे कम 44 सीटें मिली तो दूसरी तरफ कई राज्यों के धाकड़ क्षेत्रीय दलों को भी भाजपा ने पटखनी दे दी। उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी पिछले बार मिली 23 सीटों से खिसक कर सीधे पांच पर आ गयी वो भी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के सिर्फ परिवार के लोग इन सीटों पर जीते। साथ ही 2012 के विधानसभा के चुनाव में उत्तर प्रदेश की सत्ता से बेदखल हुई मायावती की बहुुजन समाजवादी पार्टी को तगड़ा झटका लगा और पार्टी लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल पायी। देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल का भी खाता नहीं खुल पाया। बिहार में भाजपा से रिश्ता तोड़कर चुनाव लड़ रही जदयू को भी करारा झटका लगा। 2009 की 20 सीटों से जदयू सीधा 2 सीटों पर आ गयी। साथ ही चारा घोटाले में सजा पा चुके लालु यादव की राजद ने अपने पिछले प्रदर्शन को फिर दोहराया और 4 सीटों पर आकर फिर से लालू का काफिला थम गया। इसके साथ ही हरियाणा की INLD  को भी पिछले बार की तरह निराशा ही हाथ लगी और महज दो सीटो पर इनेलो रूक गयी। जम्मू कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस को एक भी सीट हाथ नहीं लगी। जबकी महबूबा मूफ्ती की पीडीपी 3 सीटें लेने में कामयाब रही। महाराष्ट्र मे एनसीपी को कांग्रेस के साथ का खामियाजा भुगतना पड़ा। पार्टी पिछली बार मिली 7 सीटों के मुकाबले इस बार 4 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। हालांकि पंजाब में एनडीए को नुकसान हुआ। अरूण जेटली अमृतसर से चुनाव हार गयें। शिरोमणि अकाली दल को यहाँ पर 4 सीटें मिली। आप देश भर में 426 सीटों पर उतरी थी लेकिन उसे सिर्फ चार पर जीत मिली और वो भी पंजाब में। झारखंड मे सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चो को मोदी लहर से बड़ा नुकसान हुआ और वो महज 2 सीट जीत पायी।  लेफ्ट मे शामिल सीपीआई को महज एक सीट मिली। जबकि सीपीएम को 9 सीट मिली और जिसमें से भी 5 सीटें केरल से है यानि पश्चिम बंगाल मे ममता की आँधी मे लेफ्ट का किला पूरी तरह ढह गया। तमिलनाडू से करूणानिधी की पार्टी को भी करारी शिकस्त मिली है इस बार के आम चुनाव में डीएमके खाता भी नही खोल पायी है।

उत्तर से तो कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ हो गया है, पूर्व और पश्चिम के राज्यो से मुश्किल से एक-दो सीट कांग्रेस जीत पायी है। जबकि सबसे अच्छा प्रदर्शन कांग्रेस का दक्षिण के राज्यो मे रहा। 2009 में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में सबसे ज्यादा 24 सीट जीतने वाली कांग्रेस इस बार सिर्फ दो सीट जीत पायी वो भी दोनो सीट गांधी परिवार की। राहुल गांधी और सोनिया गांधी को छोड़कर यूपी मे कोई भी कांग्रेस नेता अपनी सीट नहीं बचा पाया। दिल्ली की सातों सीट पर पिछले चुनाव में कब्जा करा था लेकिन इस बार सातों सीट हार गयी। हरियाणा मे मुश्किल से एक सीट हाथ लगी। राजस्थान, गुजरात, जम्मूकश्मीर, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडू जैसे राज्यों से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। महाराष्ट्र से गिर पड़कर 4 सीटें मिली। तो सबसे ज्यादा 9 सीटें कर्नाटक से आयीं। 8 सीट केरल से, 3 सीट असम से, 1 सीट अरूणाचल,एक सीट मिजोरम, एक सीट मेघालय, एक सीट मणिपुर, 2 सीट बिहार, 2 सीट आंध्र प्रदेश, 1 सीट छत्तीसगढ़, 2 सीट मध्य प्रदेश, 3 सीट पंजाब, 4 सीट पश्चिम बंगाल से कांग्रेस को मिली।  महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, हरियाणा,मिजोरम, मणिपुर, अरूणाचल और मेघालय ऐसे राज्य है जहाँ कांग्रेस की सरकार है और उत्तर पूर्व के चार राज्यों को छोड़कर कांग्रेस को हर राज्य मे तगड़ा झटका लगा है। कांग्रेस किसी भी राज्य मे दहाई का आंकड़ा यानि 10 सीट से ऊपर नहीं जा पाई। और केरल, कर्नाटक को छोड़कर इक्का-दुक्का सीट कर-कर के कांग्रेस को कुल 44 सीटें मिली है। और इस तरह पूरा यूपीए गठबंधन 59 पर ही रूक गया।

भाजपा को मोदी लहर का फायदा लोकसभा में बहुमत के तौर पर मिला। 282 सीटों मे लगभग हर राज्य का योगदान रहा। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने कमाल ही कर दिया। सारे सियासी समीकरणो को तार तार करते हुए मोदी लहर मे भाजपा को 80 सीटों वाले इस सबसे बड़े राज्य से 71 सीट मिली। भाजपा के यूपी में इस रिकॉर्ड प्रदर्शन के लिए श्रेय भाजपा प्रदेश प्रभारी अमित शाह को दिया जा रहा है। जिन्होनें पिछले चुनाव में मिली 11 सीटों को सात गुना कर दिया है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश की 4, उत्तराखंड की 5, गुजरात की 26, गोवा की 2 और राजस्थान की 25  सभी सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज करते हुए कांग्रेस को क्लिन स्वीप किया है। भाजपा शासित मध्य प्रदेश की 29 मे से 27 सीटें भाजपा को मिली। साथ ही एक और भाजपा शाषित राज्य छत्तीसगढ़ से 11 मे से 10 सीट पार्टी को मिली। येदिरप्पा के जाने की वजह से पिछले कर्नाटक विधानसभा मे हारी बीजेपी को यहाँ भी 28 मे से 17 सीटें मिली। महाराष्ट्र मे जबरदस्त एंटी-कांग्रेस फेक्टर के चलते भाजपा को 48 में से 23 सीट मिली जबकि उसके सहयोगी शिवसेना को 18 सीेटें मिली। पंजाब में हांलाकि अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा। भाजपा को महज 2 सीट मिली। झारखंड जेएमएम और बिहार जदयू के धोका देने के बाद भाजपा ने वापसी की है। बिहार की 40 में से 22 सीटे भाजपा के हाथ लगी जो कि पिछली बार 12 सीट थी और साथ ही भाजपा के साथ का फायदा उठाते हुए रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने भी 6 सीट हासिल की। जबकी झारखंड की 14 में से 12 सीटें भाजपा को मिली। ये तो वो जगह है जहाँ भाजपा मुकाबले मे रहती ही रहती है। 272 का आंकड़ा पार करने के लिए इस बार भाजपा को ऐसी जगह से भी सीटें मिली जहाँ भाजपा मुश्किल से जीतती है। पश्चिम बंगाल से 2, असम की 14 मे से 7, तमिलनाडू से एक, अरूणाचल से एक, हरियाणा से 10 में से 7, जम्मू कश्मीर की 6 सीटों मे से 3 सीट, आन्ध्र प्रदेश की 3 सीट, ओडिसा से भी एक सीट भाजपा ने हासिल की है। केन्द्र शासित राज्यो में पुडूचेरी को छोड़कर बाकी 6 जगह भाजपा का कमल खिला है। चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, अण्डमान और निकोबार, लक्षद्वीप सब जगह की एक एक सीट पर भाजपा ने परचम लहराया है और दिल्ली की सातों सीटों पर भी भाजपा ने ही झंडा गाड़ा है। कुछ इस तरह भाजपा ने अपने 272 + अभियान को पूरा कर ही लिया।

जहाँ उत्तर के राज्यो मे क्षेत्रीय दलों को सूपड़ा साफ हो गया पर दूसरी तरफ तमिलनाडू मे जयललिता की पार्टी एआइएडीएमके ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए 39 मे से 38 सीटों पर कब्जा किया है। इसी के साथ आंध्र मे भाजपा के सहयोगी तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी)  ने जोरदार वापसी की है और 16 सीटें जीती है। साथ ही नये राज्य तेलंगाना के गठन का पूरा फायदा तेलंगाना राष्ट्र समिति को मिला है और टीआरएस ने वहाँ 11 सीटें जीती है। ओड़िसा मे बीजू जनता दल का जादू कायम है और वहाँ बीजेडी ने 21 में से 20 सीटें जीती है। पश्चिम बंगाल मे ममता के तूफान मे तृणमूल कांग्रेस को 42 मे से 34 सीटें मिली है। जम्मू कश्मीर में पीपूल्स डेमोक्रेटिक पार्टी को भी 6 मे से 3 सीटें मिली है।

सारे देश में मोदी का प्रचार रंग लाया, और भाजपा ने अपने अकेले के दम पर बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया है। 1984 में इंदिरा गांधी के मृत्यु के बाद सीम्पेथी फेक्टर के चलते कांग्रेस को 406 सीटें मिली थी। इस चुनाव के बाद बहुमत की सरकार का चलन बंद हो गया। 30 साल बाद फिर से पूर्ण बहुमत वाले दल की सरकार आयी है। एनडीए का कुनबा चाहे फैल ना पाया हो लेकिन मोदी की लोकप्रियता के चलते इस गठबंधन को 335 सीटें मिली है। जो किसी गठबंधन के तौर पर सबसे ज्यादा है। मोदी ने 2014 के चुनाव मे तो इतिहास रच दिया है लेकिन क्या वो अगले पाँच साल मे काम करके भारत को भी विश्व मे विकास का इतिहास रचने मे सक्षम कर पायेंगे। अभी तो खैस इंतजार मोदी जी के शपथ ग्रहण समारोह का। मंत्री मंडल का ऐलान भी रोचक रहेगा।

नमो नमो।

 

 

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