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मोदी लहर में बह गये सूरमा

मोदी लहर सब पर भारी

मोदी लहर सब पर भारी

मोदी लहर ने पूरे देश में सूनामी ला दी। 2014 के चुनाव जैसे ही घोषित होने शुरू हुए वैसे ही कई नेताओं की चेहरे की मुस्कान गायब होती चली गयी। मोदी लहर में भाजपा ने पूर्ण बहूमत हासिल किया है और एऩडीए गठबंधन ने सवा तीन सौ का आंकड़ा पार किया है। गुजरात से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, असम, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल हर तरफ कांग्रेस को जोरदार हार का सामना करना पड़ा।

मोदी लहर में कांग्रेस के बड़े-बड़े मंत्री भी अपनी सीट नहीं गंवा बैठे। मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा सीट से कमलनाथ और इसी राज्य की गूना सीट से यूपीए सरकार के ऊर्जा मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी सीट बचा सके। इसके अलावा करीब दो लाख वोट से गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे महाराष्ट्र के सोलापुर से हार गये। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद तो अपनी जमानत भी बचा सके। खुर्शीद उत्तर प्रदेश की फर्रूखाबाद सीट पर चौथे स्थान पर रहे। भाजपा के विजयी उम्मीदवार मुकेश राजपूत से वो करीब 3 लाख वोटो से हारें। वित्त मंत्री पी चिदंबरम तो चुनाव ही नहीं लड़े। उनकी जगह तमिलनाडू की शिवगंगा सीट से उनकी बेटे कीर्ति चिदम्बरम मैदान में उतरे। लेकिन वो चौथे स्थान पर रहे।

कांग्रेस के लिए 2014 का चुनाव काल बनकर आया। राहुल के नेतृत्व मे चुनाव लड़ रही कांग्रेस के लिए ये इतिहास का सबसे खराब प्रदर्शन है। महज 44 सीटें जीती कांग्रेस जिसमें से ज्यादातर दक्षिण के राज्यो से है। उत्तर प्रदेश मे राहुल और सोनिया को छोड़कर तमाम दिग्गज हार गये। कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी से हार गये। अपने बयानों के लिए बदनाम बेनी प्रसाद वर्मा को भी करारी हार हाथ लगी। गोंडा सीट से भाजपा के कीर्ति वर्धन सिंह ने करीब ढाई लाख वोट से उन्हे हराया। मानव संसाधन व रक्षा राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी धौरहरा सीट पर चौथे स्थान पर रहे। इसके अलावा गृह राज्य मंत्री आर.पी.एन सिंह भी हार गये।

राजस्थान, गुजरात ये ऐसे राज्य है जहाँ कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया हो गया। राजस्थान मे जो बड़े मंत्री हारे वो है अजमेर सीट से कार्पोरेट मंत्री सचिन पायलट, अलवर सीट से खेल मंत्री जितेन्द्र सिंह और जोधपुर सीट से संस्कृति मंत्री चंद्रेस कुमारी। गुजरात मे भी भाजपा कांग्रेस के हाथ से सारी सीट छीन कर ले गयी। यहाँ से हारने वाले मंत्री है खेड़ा सीट से खनन मंत्री दीनशा पटेल और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री माधव सिंह सोलंकी।

आंध्र प्रदेश के बंटवारे का फायदा मिलने की जगह कांग्रेस यहाँ सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गयी। तेलंगाना को राज्य बनाने की देरी और सीमांध्र मे राज्य के विभाजन के गुस्से के चलते दोनो जगह जनता ने कांग्रेस को दरकिनार कर दिया। मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। काकिनाड़ा सीट से राजू तेदेपा के थोटा नरसिम्हम से हार गये। तमिलनाडू मे जयललिता की आंधी में केेंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम की जगह खड़े हुए उनके बेटे कीर्ति चिदम्बर को भी हार का सामना करना पड़ा। हालांकि दक्षिण के अन्य दो राज्य केरल और कर्नाटक से आने वाले मंत्री अपनी सीट बचाने मे कामयाब रहे। केरल तिरूवनंतपुरम से शशि थरूर और कर्नाटक से आने वाले रेल मंत्री मल्लिकार्जून खड़गे और पेट्रोलियम मंत्री अपनी सीट बचा सके। इन दो राज्यों से ही कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीट मिली है।

केन्द्र शाषित राज्य भी कांग्रेस के लिए बुरी खबर लाये। दिल्ली की सात, और बाकी के छह केन्द्र शाषित राज्यों की छह सीटों पर कांग्रेस को हार देखनी पडी है। दिल्ली से कानून मंत्री कपिल सिब्बल और महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ को अपनी सीट गँवानी पड़ी। पुडूचेरी से पीएमओ और कार्मिक मंत्री वी नारायणसामी भी हार गये।

कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस का साथ देने वाले राजनीतिक दलों को भी तगड़ा झटका लगा। उत्तर प्रदेश के बागपत से नागरिक उड्डयन मंत्री राष्ट्रीय लोकदल नेता भाजपा के सत्यपाल सिंह से बड़े अन्तर से हारे। इसी के साथ कांग्रेस को बाहर से समर्थन देने वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी को भी कांग्रेस विरोधी लहर से नुकसान हुआ। सपा नेता मुलायम सिंह यादव के सिर्फ परिवार के लोग ही जीत पाये तो बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। बिहार में कांग्रेस का साथ दे रहीं लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल को फिर से करारी शिकस्त मिली। लालू यादव की बेटी मीसा भारती और पत्नी राबड़ी देवी दोनो हार गये। और साथ ही भाजपा से नाता तोड़कर कांग्रेस के करीब जाने की कोशिश मे लगी जनता दल यूनाइटेड पिछली बार मिली 20 सीटों से इस बार 2 सीट पर आ गयी। पार्टी के अध्यक्ष शरद यादव को मधेपूरा सीट से हार का सामना करना पड़ा।

जम्मू-कश्मीर की सत्ता पर काबिज नेशनल कांफ्रेंस को भी कांग्रेस का साथ का खामियाजा भुगतना पड़ा। राज्य की एक भी सीट पार्टी के हाथ नहीं आयी। खूद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पिता पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को श्रीनगर सीट से हार झेलनी पड़ी। साथ ही कांग्रेस भी यहाँ खाली हाथ रहीे। स्वास्थय मंत्री गुलाम नबी आजाद उधमपुर सीट से चुनाव हार गये। महाराष्ट्र मे भी यहीं देखने को मिला। कांग्रेस को मिली 2 सीटों में से एक सीट आदर्श घोटाले के आरोपी अशोक चव्हाण की है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को एन्टी कांग्रेस लहर का शिकार होना पड़ा। एनसीपी अध्यक्ष जहाँ चुनाव ही नहीं लड़े। वहीं केन्द्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल को गोंडिया सीट से भाजपा प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा।

लेफ्ट को भी इस चुनाव मे भारी नुकसान हुआ। लेफ्ट का गढ़ माने जाने वाले पश्चिम बंगाल में सीपीएम महज 2 सीट जीत पायी। पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य भी चुनाव मे हार गये।

कुछ इस तरह मोदी लहर और कांग्रेस विरोधी लहर के चलते कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने इस तरह 282 का सीट जीतकर अकेले बहुमत हासिल कर लिया। और इसका फायदा उठाते हुए एनडीए के घटक दलों भी मालामाल हो गये। साथ ही कांग्रेस से दूरी बनाकर रखने वाली ममता बनर्जी, जयललिता और नवीन पटनायक को भी जबरदस्त फायदा हुआ।

 

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