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मोदी मंत्रिमंडल-थोडा है पर ज्यादा कारगर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

नरेंद्र मोदी ने 26 मई को 2014 लोकसभा चुनाव में प्रचन्ड बहुमत हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पहली बार गैर कांग्रेसी पूर्ण बहुमत वाली पार्टी ने केन्द्र में सरकार बनायी। जश्न भी इतना ही बड़ा हुआ। सार्क देशों के राष्ट्रध्यक्ष नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शरीक हुए। बड़े ताम-झाम के बीच मोदी साहब ने शपथ ली।

मंत्री पद का बंटवारा बेहद दिलचस्प रहा। हर बार की तरह तमाम मीडिया शपथ ग्रहण करने और औपचारिक तौर पर मंत्रालय बंटने तक अंधेरे मे तीर चलाती रही। हालाँकि कई तीर निशाने पर भी लग गये। गुजरात मे नरेंद्र मोदी जिस तरह से काम करते थे उनके काम करने का वही तरिका केंद्र मे भी बदस्तूर दिखने लगा है। पहले से ही मिनिमम गवर्मेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस की वकालत करने वाले मोदी ने मंत्रिमंडल मे भी यहीं फार्मूला अपनाया।

मंत्रालय बंटवारे मे सबसे बड़ी दिक्कत आती है गठबंधन के सहयोगियों का अडंगा। लेकिन नरेंद्र मोदी पर ये दबाव हालांकि उतना नहीं था क्योंकि भाजपा ने अकेले दम पर बहूमत हासिल किया है। फिर भी सहयोगी दलों की जरूरत आज नहीं है तो शायद आने वाले चुनाव मे पड़ जाये तो सबको संतुष्ट करना ही पड़ता है।

यूपीए 2 के 77 मंत्रियों के मुकाबले मोदी मंत्रिमंडल में महज 45 मंत्रियों को शामिल किया गया है। कई मंत्रालयोें को एक किया गया है तो कई मंत्रालयों का जिम्मा एक ही राज्यमंत्री को सौंपा गया है। स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों को अलग से अन्य मंत्रालयों का राज्यमंत्री भी नियुक्त किया गया है।

ज्यादा मंत्री होने से प्रधानमंत्री को सभी से सम्पर्क में रहने में दिक्कत आती है जिसके नतीजे के तौर पर मंत्रालयों के काम पर असर पड़ता है। छोटा मंत्रिमंडल प्रधानमंत्री के रडार पर रहता है और मंत्री के लगाम कसने में आसानी रहती है। गठबंधन की मजबूरियों के चलते फिजूल में बनाये गये मंत्रालयों को अपने पुराने मंत्रालय मे मिला दिया गया है। जिसके चलते सरकार के खजाने से भी बोझ कम होगा।

प्रधानमंत्री मोदी का मंत्रिमडल कुछ इस तरह है।

मंत्रालय के साथ मंत्रियों की सूची-

नरेन्द्र मोदी – प्रधानमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, अंतरिक्ष विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग, सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दे और वे तमाम मंत्रालय जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं.
कैबिनेट मंत्री 

राजनाथ सिंह – गृह मंत्रालय

सुषमा स्वराज – विदेश मामले और प्रवासी भारतीय मामले

अरूण जेटली – वित्त, कारपोरेट मामले, रक्षा

एम वेंकैया नायडु – शहरी विकास, आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन, संसदीय मामले

नितिन गडकरी – सड़क परिवहन और राजमार्ग, जहाजरानी

डी वी सदानंदगौड़ा – रेलवे

उमा भारती – जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन

नजमा हेपतुल्ला – अल्पसंख्यक मामले

गोपीनाथ मुंडे – ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल और स्वच्छता

रामविलास पासवान – उपभोक्ता मामले, खाद्य और जन वितरण

कलराज मिश्र – सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम

मेनका गांधी- महिला एवं बाल विकास

अनंत कुमार – रसायन एवं उर्वरक

रवि शंकर प्रसाद – संचार और सूचना तकनीक, कानून एवं न्याय

अशोक गजपति राजू पुसपति – नागरिक उड्डयन

अनंत गीते – भारी उद्योग और सार्वजनिक उपक्रम

हरसिमरत कौर बादल – खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

नरेन्द्र सिंह तोमर – खान, इस्पात, श्रम एवं रोजगार

जुएल ओरांव – आदिवासी मामले

राधा मोहन सिंह – कृषि

थावर चंद गहलोत – समाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण

स्मृति ईरानी – मानव संसाधन एवं विकास

डॉक्टर हषर्वर्धन – स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

राज्य मंत्री

जनरल (अवकाश प्राप्त) वीके सिंह – पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास (स्वतंत्र प्रभार), विदेश, प्रवासी भारतीय कार्य

राव इंद्रजीत सिंह – योजना (स्वतंत्र प्रभार), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन : स्वतंत्र प्रभार: रक्षा

संतोष कुमार गंगवार- कपड़ा (स्वतंत्र प्रभार) संसदीय मामले, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन

श्रीपद येशो नाईक – संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार), पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार)

धर्मेन्द्र प्रधान- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (स्वतंत्र प्रभार)

सर्वानंद सोनोवाल –कौशल विकास, उद्यमशीलता, युवा मामले एवं खेल (स्वतंत्रप्रभार)

प्रकाश जावड़ेकर – सूचना एवं प्रसारण (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार), संसदीय मामले.

पीयूष गोयल- ऊर्जा- (स्वतंत्र प्रभार), कोयला (स्वतंत्र प्रभार), नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार)

डॉक्टर जितेन्द्र सिंह- विज्ञान और तकनीकी (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग

निर्मला सीतारमण- वाणिज्य और उद्योग (स्वतंत्र प्रभार) वित्त, कारपोरेट मामले

जीएम सिद्धेरा – नागरिक उड्डयन

मनोज सिन्हा – रेलवे

निहालचंद – रसायन एवं उर्वरक

उपेन्द्र कुशवाहा – ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल और स्वच्छता

पी राधाकृष्णन – भारी उद्योग और सार्वजनिक उपक्रम

किरन रिजिजु-  गृह

कृष्ण पाल – सड़क परिवहन और राजमार्ग, जहाजरानी

संजीव कुमार बालयान- कृषि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

मनसुख भाई धनजीभाई वसावा- आदिवासी मामले

रावसाहेब दादाराव दान्वे – उपभोक्ता मामले, खाद्य और जन वितरण

विष्णु देव साई – खान, स्टील, श्रम और रोजगार

सुदर्शन भगत – सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण.

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