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बदायु की खौफनाक रेप की घटना-हैवानियत की एक और मिसाल

बदायुँ की दर्दनाक तस्वीर Image Courtesy-  http://www.deccanchronicle.com/

बदायुँ की दर्दनाक तस्वीर
Image Courtesy- http://www.deccanchronicle.com/

दिल को चीर देने वाली बदायु की घटना ने इंसानियत को फिर शर्मशार कर दिया है। एक ही परिवार की दो नाबालिग लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार और उससे से भी दर्दनाक पेड़ पर जिन्दा फांसी के फंदे पर चढ़ाकर मार देना। किसी भी इंसान की आत्मा को झकझोर देने वाली इस घटना ने फिर से मानवता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

सन् 2012 में दिल्ली का निर्भया रेप कांड भी इतना ही दर्दनाक था। फर्क सिर्फ इतना है कि वो घटना दिल्ली जैसे बड़े शहर मे हुई थी और अब जो निर्दयी घटना सामने आयी है वो उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर बदायु की है। समानता बस इतनी है कि वहाँ भी इंसानियत कलंकित हुई थी यहाँ भी मानवता ने मुँह फेर लिया। आखिर इंसान इतना निर्दयी कैसे हो सकता है।

फांसी के फंदे पर झुलती इन दो जिंदगियों ने किसी का क्या बिगाड़ा था जो इन्हें ऐसी खौफनाक मौत मिली। जिंदगी जीने का हक छिनने का हक इस घटना के जिम्मेदार वहशी दरिंदो को किसने दिया है। आज फिर से हम शर्मशार है कि फिर हम किसी को नहीं बचा पाये। समाज के ठेकेदार अब चुप क्यों है। लांछन कसने वाले लोग अब क्यों चुप है।

इस दिल दहला देने वाली घटना को अंजाम देने वालो में दो पुलिसवाले भी शामिल थे। जिस पुलिस पर जिम्मेदारी है समाज की रक्षा वहीं इन दो बहनों के साथ हुए अपराध के सहभागी बन गये। जब घर वालों ने पुलिस को उनकी बेटियों को ढुँढने को कहा तो यहाँ लचर व्यवस्था ने आँखे दिखा दी। पुलिस अगर सही समय पर पीडितो के परिजनो की मद्द कर देती तो शायद कुछ हो सकता था।

आबरू को तार तार किया ही और उसके बाद बेजान हो चुके शरीर को भी नहीं बक्शा। फांसी के फंदे पर लटकाकर दरिंदो ने पीडित लड़कियों से उनका जीवन भी छिन लिया। कितना दर्दनाक है ये सब, लेकिन अब ये रोज की बात हो गयी है। लड़कियों की इज्जत की अहमियत तो आप उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयान से लगा सकते है। एक टीवी पत्रकार के सुरक्षा को लेकर पूछे गये सवाल के जवाब मे साहब ने उत्तर दिया “आपको तो कोई खतरा नहीं है, नही है ना.. तो इसका प्रचार करो”। अब वोट देने वाले पीडित लड़कियों के परिजनों ने ऐसा शायद ही सोचा हो कि वोे जिसे वोट दे रहे है वो ऐसा बोलेगा।

देश की खबरों में छाया बदायु गैंगरेप कांड अब सियासत का अखाड़ा बन गया है। लोकसभा चुनाव के बाद नयी सरकार बनने की वजह से मुद्दो की कंगाली के चलते कांग्रेस, बसपा और यहाँ तक कि भाजपा खुद इस मलाईदार मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहते। राहुल ने बदायुँ का मुआयना किया तो पीछे पीछे मायावती भी आ धमकी। लेकिन सियासत सिर्फ इसी रेप कांड पर क्यों हो रहीं है उत्तर प्रदेश के ही कई इलाकों मे और भी बलात्कार हुए है वहाँ तो कोई राजनीति का परिंदा पर तक नहीं मारने गया। सियासी रोटियाँ सेकने के लिये क्या सिर्फ मीडिया की नजरो मे रहना जरूरी है। और खुद मीडिया बाकी जगह गया ही नहीं। ये मौकापरस्ती है जो जनता बखूबी जानती है।

बड़े सियासी ड्रामे के बीच अब बदायुँ रेप कांड की जाँच मे मद्द से कन्नी काटनी वाली पुलिस जी तोड़ महनत में जुटी है। केन्द्र ने अपने स्तर पर मामले को गम्भीरता से लिया है। हालांकि देश के प्रधानमंत्री ने इस घटना पर चुप्पी नहीं तोड़ी है। लेकिन राज्य सरकार किरकिरी होने के बाद हरकत मे आयी है। सीएम अखिलेश ने पहले पीडित परिवार के लिए मुआवजे का ऐलान किया। फिर चारों ओर से उठ रही सीबीआई जाँच की मांग पर भी मुहर लगा दी। वैसे तो मुख्यमंत्री के पिता जी मुलायम सिंह यादव के मुताबिक रेप लड़को की मामूली सी गलती है, पर दबाव मे ही सही समाजवादी पार्टी सरकार हरकत मे आयी है। सीएम ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को भी पद से हटा दिया है। देर आये दुरूस्त आये.. कुछ इस तरह सरकार ने अपनी गम्भीरता व्यक्त करने की कोशिश की है।

देश भर में एक से एक बालात्कार की वारदात सामने आ रही है। दिल्ली गैंगरेप के बाद कानून भी बदला गया लेकिन हालत मे कोई सुधार नहीं आया है। क्या कारण है कि ये अमानवीय अपराध का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। क्या कानून में ही कमी रह गयी है या फिर हमारे समाज ने अपने मुल्यो से मुँह मोड़ लिया है। संस्कारों और शिष्टाचार तो आजकल घरों से लेकर स्कूलों तक सब जगह से गायब हो चले है। जब कोई सही और गलत का फर्क ही नही बतायेगा तो देखने वाला तो सब एक ही नजर से देखेगा। हमें समाज को बदलना होगा। और इसके लिये हमें बुनियादी परिवर्तन करने होंगे।

मुल्यों और संस्कारो को माँ-बाप को बच्चो को सिखान ही होगा। ताकि बेटियों के साथ-साथ उनके घर के चिराग भी महफूज रहे। हम भारतीय संस्कृति क्यों भूल रहे है जहाँ रावण जैसा राक्षस ने भी बिना अनुमति के सीता मैय्या को हाथ तक नहीं लगाया था। हमें अपनी संस्कृति को वापस जिंदा करना होगा ताकि समाज सुरक्षित हो सके। इस सबके बाद कहीं जगह बचती है तो वो डर की है जो कानून से आता है। जब तक अपराध का खौफ नहीं होगा तब तक मुल्य़ बेअसर है। तो मुल्य और कानुन दोनो को साथ मिलकर समाज को महिलाओं के लिए सुरक्षित करना होगा।

 

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