सामग्री पर जाएं
Advertisements

सोलहवीं लोकसभा की शपथ

सोलहवीं लोकसभा का आगाज

सोलहवीं लोकसभा का आगाज

नरेंद्र मोदी के मजबूत की लीटरशीप मे 2014 के लोकसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने वाली भाजपा की सरकार ने आते ही ताबड़तोड़ काम करना शुरू कर दिया है। भाजपा को 16वीं लोकसभा मे 282 सीटें मिली जिसके चलते 30 साल बाद किसी एक पार्टी को बहुमत मिल पाया। फिलहाल मोदी के वडोदरा सीट छोड़ने और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री की मृत्यु के बाद दो सीटे खाली हो गयी है और इस तरह भाजपा के पास 280 सीट रह गयी है।

मौजूदा लोकसभा में दूसरा सबसे बड़ा दल है कांग्रेस। कांग्रेस के पास 44 सीटें है जो कि इतिहास में कांग्रेस पार्टी का सबसे कम सीटे है। कांग्रेस के बाद आती है 37 सीटों के साथ जयललिता की पार्टी एआइएडीएमके, उसके बाद 34 सीटों वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और फिर उसके बाद बीस से ज्यादा सीटें जीतने वाली आखिरी पार्टी बीजू जनता दल (BJD)। बाकी बचे राजनीतिक दलों में सिर्फ भाजपा की सहयोगी शिवसेना, टीडीपी और इसके अलावा तेलंगाना राष्ट्र समिति और वाईएसआर कांग्रेस ही दहाई का आंकड़ा पार कर पाये। बाकी राजनीतिक दल डबल डिजिट के पास भी नहीं पहुँच पाये।

4 जून की तारिख को मोदी सरकार ने 16वीं लोकसभा का पहला दिन मुकर्रर किया। लेकिन महाराष्ट्र के कद्दावर बीजेपी नेता और हाल ही में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बनें गोपीनाथ मुंडे की अचानक हुई मृत्यु के चलते पहले दिन लोकसभा को मुंडे को श्रद्धांजली देने के बाद सदन को स्थगित कर दिया गया। राष्ट्रपति भवन मे लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर कमलनाथ ने शपथ ली। पहले दिन संसद पहुँचे नेताओं ने एक दुसरे का स्वागत किया। कांग्रेस समेत गैर-एनडीए दलों ने एनडीए के नेताओं खासतौर पर भाजपा के तमाम नेताओं को जीत की बधाई दी। खास बात यह रही है कि चुनाव प्रचार के दौरान मोदी पर हमलावर रही सोनिया गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से अभिवादन किया।

5 जून को लोकसभा मे दरबार फिर सजा। सदन की कार्रवाही शुरू होते ही सबसे पहले प्रोटेम स्पीकर कमलनाथ ने सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वड़ोदरा, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का उत्तर प्रदेश की मैनपुरी और के. चंद्रशेखर राव का आंध्र प्रदेश की लोकसभा सीट से इस्तीफा स्वीकार किया। ये सभी नेता दो-दो सीटों से चुनाव जीतकर आए थे। प्रोटेम स्पीकर कमलनाथ ने सदन को इन सभी के इस्तीफे की जानकारी दी और बताया कि विगत 29 मई, 2014 से इनका इस्तीफा स्वीकार किया जाता है और ये तीनों सीटें अब रिक्त घोषित की जाती हैं।

इसके बाद कमलनाथ ने सांसदों के शपथ-ग्रहण की प्रक्रिया शुरू की। सबसे पहले तीन वरिष्ठ सासंदों को शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया गया, जिसमें पहले पीएम नरेंद्र मोदी, दूसरे लालकृष्ण आडवाणी और तीसरे नंबर पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सांसद पद की शपथ ली। इसके बाद अन्य सदस्यों को क्रमवार शपथ दिलाई गई।केंद्रीय विदेश मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज, उमा भारती और डॉ. हर्षवर्धन ने लोकसभा में संस्कृत भाषा में शपथ ली। हालांकि सुषमा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे संस्कृत में शपथ लेंगी। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने पंजाबी में शपथ ली।

शपथ लेने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज झक सफेद कुर्ता, चूड़ीदार पायजामा और जवाहर कट पहन कर सदन में आए थे। उन्होंने काली सेंडल और जेब में काला पेन लगा रखा था। मोदी के शपथ लेने पर सोनिया सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों ने मेजें थपथपाकर उनका अभिवादन किया। शपथ लेने के बाद मोदी ने रजिस्टर पर हस्ताक्षर किया और फिर सोनिया सहित सभी सदस्यों का अभिवादन स्वीकार किया।

जब सोनिया गांधी शपथ लेने के लिए खड़ी हुईं तो 44 सीटें जीतने वाली कांग्रेस के सदस्‍यों ने मेजें थपथपाकर और ताली बजाकर उनका स्‍वागत किया। उन्‍हें शपथ लेते सबसे करीब से देखने वालों में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मेनका गांधी रहीं। दोनों उनकी सीट के सामने बैठे थे।

बाद में लोकसभा के महासचिव ने अन्य सदस्यों को शपथ दिलाने का कार्य संभाला। उन्होंने पहले कैबिनेट मंत्रियों को सदस्यता की शपथ दिलाना शुरू किया। कई केन्द्रीय मंत्रियों ने ईश्वर के नाम पर हिन्दी में शपथ ली जबकि सुषमा स्वराज, उमा भारती और हषर्वर्धन ने संस्कृत में शपथ ली। केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने हिन्दी में सत्यनिष्ठा के नाम पर शपथ ली। डीवी सदानंद गौडा, अनंत कुमार, जीएम सिद्धेश्वर सहित कुछ केन्द्रीय मंत्रियों ने अपनी मातृभाषा में शपथ ली। गौडा, अनंत कुमार और सिद्धेश्वर ने कन्नड़ में जबकि सर्बानंद सोनोवाल ने असमिया में और जुएल ओराम ने उड़िया भाषा में शपथ ग्रहण की।

शपथ लेने के बाद मेनका गांधी जब विपक्षी बेंचों की ओर से निकलकर अपनी सीट की ओर बढ़ने लगीं तो निकट बैठी सोनिया और उन्होंने एक दूसरे का अभिवादन किया हालांकि गर्मजोशी की कमी साफ नजर आयी।

मंत्रिपरिषद के सदस्यों और अंडमान निकोबार एवं आंध्र प्रदेश के सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद प्रोटेम स्पीकर ने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौडा, लोकसभा के दो पूर्व उपाध्यक्षों करिया मुंडा और एम थंबीदुरै को शपथ ग्रहण के लिए बुलाया। मंत्रिपरिषद के सदस्यों के शपथ लेने तक प्रधानमंत्री सदन में मौजूद थे।

बिहार से भाजपा के टिकट पर चुनकर आये कीर्ति आजाद, हुकुमदेव नारायण यादव और वीरेन्द्र कुमार चौधरी ने मैथिली में शपथ ली, जबकि चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर लोक जनशक्ति पार्टी में शामिल हुए और खगड़िया से चुने गये चौधरी महबूब अली कैसर ने अंग्रजी में शपथ ली।

बिहार से शपथ लेने वालों में फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व गृह सचिव आर के सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री राकांपा नेता तारिक अनवर, जदयू छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सुशील कुमार सिंह, लोजपा नेता रमा किशोर सिंह और भाजपा के छेदी पासवान प्रमुख थे। बिहार से शपथ लेने वालों में लोजपा के टिकट पर पहली बार चुनाव जीतकर निचले सदन में पहुंचे चिराग पासवान भी शामिल थे जिन्होंने शपथ लेने के बाद अपने पिता और लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान का पैर छूकर आर्शीवाद लिया।

लोजपा नेता राम चन्द्र पासवान ने भी अपने बड़े भाई रामविलास पासवान का पैर छूकर आर्शीवाद प्राप्त किया। वह समस्तीपुर से चुने गये हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकता उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर आये तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने हिंदी में शपथ ली।

उत्तर पूर्वी दिल्ली से भाजपा के टिकट पर चुने गये भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने बिना पढ़े, धारा प्रवाह हिंदी में शपथ लेकर सदस्यों की सराहना बटोरी। दिल्ली से ही चुने गये उनकी पार्टी के दूसरे सदस्य प्रवेश वर्मा, मीनाक्षी लेखी और महेश गिरी ने संस्कृत में शपथ ली।

संसद का यह विशेष सत्र 11 जून तक चलेगा। सत्र के बाकी दिनों के कार्यक्रम के तहत 6 जून को स्पीकर का चुनाव होगा। 7 और 8 जून के अवकाश के बाद 9 जून को राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा। 10 और 11 जून को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा होगी और प्रधानमंत्री धन्यवाद ज्ञापन करेंगे। राष्ट्रपति के अभिभाषण और मोदी के धन्यवाद ज्ञापन के मसौदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल मंजूरी दे चुकी है।

सांसदों ने हर बार की तरह शपथ तो ले ली है। लेकिन संसद के अदंर होने वाली नौटंकी, गाली-गलौच, मार-ताड़, शोर-शराबा फिर नहीं होगा ऐसा कोई गारंटी फिलहाल नही है। संसद में पहले दिन आते वक्त प्रवेश द्वार पर संसद को नतमस्तक होकर प्रणाम करके जो आदर लोकतंत्र के मंदिर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाया था उम्मीद है आगे भी पीएम इस मंदिर की शांति और पवित्रता बनाये रखेंगे। सांसद अगर सिर्फ शपथ को चंद पलों के भाषण के अलावा अपने काम भी दिखायेंगे तो भारत देश जरूर सुधर पायेगा।

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s

%d bloggers like this: