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स्वर्ण मन्दिर में तीस साल बाद फिर से हिंसा

स्वर्ण मन्दिर

स्वर्ण मन्दिर

तीस साल पहले 5 जून 1984 को सिखों के धर्म स्थल पंजाब के अमृतसर मे स्थित स्वर्ण मन्दिर मे ऑपरेशन ब्लू-स्टार को भारतीय सेना ने अंजाम दिया था। मन्दिर मे पनाह लेकर बैठे सिख आतंकवादियों को मार गिराने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऐसा करने का आदेश दिया था। इसी घटना के बदले में इंदिरा गांधी की सुरक्षा मे तैनात दो सुरक्षा गार्डो ने गोलियों से भुनकर उनकी हत्या कर दी थी। इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद देश के अलग-अलग हिस्सो मे सिख-विरोधी दंगे हुए थे। जिसमें हजारों सिखों को मार दिया गया था।

6 जून 2014 को आपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर फिर से स्वर्ण मन्दिर मे फिर से हिंसा हुई। नौबत ये आ गई कि दोनों पक्षों की तलवारें आपस में टकरा गईं। यह टकराव उस वक्त शुरू हुआ जब अकाली दल अमृतसर पार्टी के नेता सिमरनजीत सिंह मान ने स्वर्ण मंदिर में अकाल तख्त के पास से लोगों को संबोधित करने की मांग की।

इससे अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने इनकार कर दिया। इस पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी एसजीपीसी के समर्थकों और अकाली दल अमृतसर के कार्यकर्ता भिड़ गए और माहौल हिंसक हो गया।

इसमें छह से ज्यादा लोग घायल बताए गए हैं। झड़प के दौरान कई घबराए तीर्थयात्री सुरक्षा के लिए भागे। इस बीच कट्टरपंथी संगठन दल खालसा द्वारा आहूत बंद के मद्देनजर अमृतसर में कई स्थानों पर दंगा विरोधी पुलिस के 1500 जवान तैनात किए गए हैं।

हिंसक संघर्ष को दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक करार देते हुए पंजाब के सांसदों ने आज घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि धर्म को राजनीति से अलग रखना चाहिए। शिरोमणि अकाली दल के सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने संसद परिसर में कहा, ‘‘आज का दिन हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन हमें इस बात पर अफसोस भी है कि आज ऐसी घटना हो गर्इ। हम इसकी निंदा करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए था।’’

यह पूछने पर कि क्या अकाली दल या एस.जी.पी.सी. के सदस्यों ने हिंसा भडकार्इ थी, चंदूमाजरा ने कहा कि जांच के बाद ही कुछ पता लग सकेगा। आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने इस घटना को शर्मनाक बताया और आज के दिन को इंसानियत के लिए ‘काला दिवस’ करार दिया। उन्होंने कहा कि धर्म को राजनीति से अलग रखना चाहिए।

स्वर्ण मन्दिर फिर आज हिंसा का शिकार हुआ है। सिखों के इस प्रमुख तीर्थ स्थल को नाक के लिये इस तरह शर्मशार करना बेहद अफसोसजनक है। तीस साल बाद फिर से ब्लू स्टार अभियान का मंजर जिंदा हो गया। धर्म और राजनीति को दूर रखा जाना चाहिए ताकि सब ठिक रहे

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