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लैंड बिल या सभी बिल के विरोध में विपक्ष ??

मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों का पवित्र रिश्ता

मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों का पवित्र रिश्ता

बढ़े दिनो बाद संसद में लोकतंत्र फिर से वापस आ गया है। वो दिन भी बढ़े ही मजाकिया थे जब मीरा कुमार जैसी योग्य और सफल स्पीकर लोकसभा को चलाती थी। मजाल है किसी की कोई आवाज भी निकाल दे। पिन ड्रोप साइलेंस और बेहद गंभीरता के साथ संसद का सत्र एक बाद एक चुटकियों में गुजर जाता था। विपक्ष भी बड़ा ही सहयोग करता था सरकार कि संसद पर लगने वाला जनता का पैसा खराब ना जायें। हां, वो अलग बात है कि जैसे ही लोकसभा चुनाव की धमक राजनीतिक दलों के पैरों में पड़ी, सभी ने ताथा-थईय्या शुरू कर दिया। मैडम स्पीकर का डॉयलॉग ‘चुप हो जाओ, चुप हो जाओ, अरे भाई चुप भी हो जाओ’ सभी उच्च कोटि के जोक्स की पसंद बन गये।

जैसे तैसे मनमोहन सरकार ने बजट सत्र निकाला और फिर चुनाव आ गये। मनमोहन को जनता ने चलता कर दिया और मोदी जी की ग्रांड एन्ट्री हुई। भईया पूर्ण बहुमत के साथ में बेहद ही प्यारे और अच्छे सहयोगियों के साथ सरकार बनी। लोकसभा में तो अब धड़ाधड़ कानून पास होने की पूरी गारंटी हो गई लेकिन राज्यसभा मे विपक्ष नाम का रावण अभी भी पैर फैलाये बैठा रह गया।

अब हालत ये है कि कांग्रेस तो जानी दुश्मन के विलेन की तरह हमेशा सरकार को कोसने में लगी रहती है। बाकि बचा विपक्ष जिनमे से ज्यादातर या तो मोदी की लोकसभा चुनाव की आंधी के शिकार हुए या फिर जिन्हें उनके राज्यों के लिए फंड के लिए मोदी साहब से गिला शिकवा है, वो भी मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले बैठे रहते है।

अब चाहे किसान विरोधी बिल आये या किसान हितैषी इन लोगों को सिर्फ विरोध करना है, चाहे संसद पर जनता की गाढ़ी कमाई से इकट्ठा किया गया सारा टैक्स ही क्यो ना लग जाये। इन लोगों इस बात का बुरा लग गया कि जनता ने इतने वोट उन्हें क्यों नही दिए। अगले चुनाव के तैयारी में विपक्ष ने आज की सरकार के काम-काज अडंगे डालने का मास्टरप्लान तैयार कर रखा है।

हालांकि ये बात भी सही है कि ताली एक हाथ से नहीं बजती, राज्यसभा में जैसे ही स्टेडिंग कमेटी के चंगुल से निकलकर कोल बिल पास होने पहुंचा तो विपक्ष ने हो-हल्ला शुरू कर दिया। सबने कहा- हमसे तो किसी ने पूछा ही नहीं। अब ये भी एक मुद्दा है कि आप से कोई पूछे भी क्यूं। सरकार के पास राज्यसभा में नंबर नहीं है और विपक्ष के पास लोकसभा में।

आज लैंड बिल पर इतना बखेड़ा खड़ा हो रखा है लेकिन कल जब राज्यसभा में बीजेपी के पास बहुमत होगा तो विपक्ष कहा माथा फोड़ेगा। इनकी हालत कुछ धोबी के कुत्ते की तरह होगी ‘ना घर के, ना घाट के’..

विपक्ष की बोलती बंद होना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है लेकिन जनता के लिए यही सही है कि पांच साल मोदी सरकार को खुले हाथ से काम करने का मौका मिलेगा। तभी तो अच्छे दिन का वादा जुमला नहीं जनता के लिए सच में बेहतरीन कल में तब्दील होगा।

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