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मराठवाड़ा की शान रायगढ़ किला – जानिए शिवाजी की राजधानी क्यों है खास ?

महाराष्ट्र का नाम लेते ही पहला शहर याद आता है मुंबई। लेकिन महाराष्ट्र की शान बसी है रायगढ़ में, जहां मराठवाडा का सबसे बड़ा किला है।

रायगढ का किला ऊंची पहाड़ियों पर बना है जहां तक पहुंचने के लिए रोपवे का इस्तेमाल किया जाता है। रोपवे ही रायगढ़ किले की सैर का सबसे शानदार अनुभव है। बारिश के मौसम में रायगढ़ किले की पार्किंग से किला दिखता भी नहीं है और रोपवे में बैठकर जब कोई पहाड़ के चारों तरफ फैले बादलों में घुसते हैं तो उसका अलग ही अनुभव होता है।

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रोपवे के रोमांचक सफर की शुरूआत यहां से होती है

मुंबई की चकाचौंध और भीड़भाड़ से दूर लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर रायगढ़ किला और उसके चारों ओर फैली नेचुरल ब्यूटी अलग ही है।

रोपवे के जरिए जैसे ही किले पर पहुंचते है वहां पर किले का दरवाजा आता है जहां पर सीढ़िया के जरिए पहुंचा जाता है। किले का एंट्री भी शानदार होती है बारिश के मौसम में पूरा किला कोहरे से घिरा होता है और सीढ़ियों पर चढ़ते हुए दरवाजा तो दिखता नहीं है लेकिन ऐसा लगता है कि स्वर्ग की सीढ़ियों पर चढ़ रहे हो।

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स्वर्ग के गेट जैसा रायगढ किले का एंट्री गेट

किले के अंदर घुसते ही आते है रानियों के महल। छत्रपति शिवाजी महाराज की आठ रानियां थी किले में हर रानी का अलग महल था। आज के समय में किला खंडहर हो चुका है और महलों की जगह खुले आसमान में बने पत्थरों के कमरे हैं। रानियों के महल और शिवाजी महाराज के महल के बीच में एक लॉबी है जहां कहा जाता है कि किले के नौकर रहा करते थे।

किले में शिवाजी का जनता दरबार भी है जहां पर छत्रपति शिवाजी महाराज जनता से मिलते थे और उनकी समस्याओं को सुनते थे। ये जगह ऐसी है जहां पर आकर गाइड भी शिवाजी महाराज के गौरव से भरा हुआ रहता है और जब वो किसी को शिवाजी महाराज के बारे में बताता है तो वो भी उसी गौरव का अहसास करता है। यहां पर आकर गाइड का एक नारा हमेशा याद रहेगा ‘जय भवानी जय शिवाजी’।

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कोहरे में ढकी शिवाजी महाराज की विशाल मुर्ति (इसी जगह शिवाजी महाराज का दरबार लगता था)

किले का अगला पड़ाव आता है शिवाजी महाराज का एक स्मारक जो कि महलों के परिसर के बाहर है। यहां पर भी शिवाजी महाराज की महिमा को सुनकर दिल गौरव का अहसास करता है। इस स्मारक को मंदिर की तरह पूजा जाता है और मूर्ति तक पहुंचने के लिए जूते चप्पल उतार तक जाया जाता है।

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रायगढ़ किले में शिवाजी महाराज का स्मारक

किले का अंतिम पड़ाव आती है बाजार। इसी जगह पर कभी दुकानें हुआ करती थी और शिवाजी महाराज के किले में रहने वाले लोग यहां पर खरीददारी किया करते थे। बारिश के मौसम में इस बाजार का नज़ारा अलग ही होता है।

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रायगढ़ किले के अंदर बना बाजार

गाइड का साथ यही तक होता है इससे आगे आप जा सकते है और किले के बाकी हिस्सों को देख सकते हैं और वापस लौटते हुए कुछ यादों से भरी तस्वीरें भी ले सकते हैं।

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बाजार से शिवाजी महाराज के जनता दरबार की ओर जाने वाला रास्ता

बारिश के मौसम में रायगढ़ किले का असली मजा लिया जा सकता है क्योंकि इस वक्त कोहरे से ढका किला अलग ही दिखता है। हालांकि खंडहर में तब्दील हो चुका ये किला मरम्मत की जरूरत महसूस करता है। महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार को चाहिए कि शिवाजी महाराज से जुड़ी कुछ यादों को, महलों को फिर से जीवित कर दिया जाए। ताकि यहां आऩे वाले लोग मराठाओं की शान का असली आनंद ले सकें।

वैसे गाइड काफि दिलचस्प मिलते हैं कुछ ऐसी कहानियां सुनाएंगे जो आपके दौरे को सफल बना देंगे।

जय भवानी जय शिवाजी

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