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रेणुका की छूटी हंसी.. पर भाजपा क्यों फंसी ?

कहते है लड़की अगर हंसी तो समझो फंसी, लेकिन जब मोदी जी के राज्यसभा में भाषण पर कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी हंसी तो लेकिन फंस गई भाजपा और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री बोल रहे थे। मोदी सरकार की आधार योजना का खूब मजाक उड़ाया जा रहा है। बैंक खातों से लेकर मोबाइल फोन और ना जाने क्या क्या, कई योजनाओं में आधार को लिंक करवाना अनिवार्य कर दिया गया है और इसी पर ट्वीटर से लेकर फेसबुक और जोक्स एक्सपर्ट मोदी सरकार का मजाक उड़ा रहे हैं।

मोदी जी राज्यसभा में जैसे ही आधार पर बोलने लगे और तो तभी पीछे से जोर की हंसी की आवाज़ आई। कैमरा मोदी जी पर ही था लेकिन राज्यसभा के सभापति ने प्रधानमंत्री को टोका  और फिर रेणुका चौधरी को डांटने लगे। वैसे तो प्रधानमंत्री के भाषण पर हंसना भी बहुत बचकना या फिर नेताओं के लिए सही शब्द का इस्तेमाल करूं तो तुच्ची हरकत थी। प्रधानमंत्री की बातों पर हंसना तो ठीक है लेकिन  इतनी जोर से हंसना कि पूरा राज्यसभा का हॉल गूंज उठे, उसको सही नहीं कहा जा सकता है।

खैर जब सभापति और उपराष्ट्रपति वेकैय्या नायडू रेणुका चौधरी को डांट रहे थे और यहां तक कह दिया कि कोई प्रॉब्लम हो तो डॉक्टर के पास जाकर इलाज करायें लेकिन इस बीच प्रधानमंत्री ने अपील की कि वो रेणुका चौधरी को ना डांटे और कहा- “आप रेणुका जी को कुछ ना कहें रामायण सीरियल के बाद पहली बार ऐसी हंसी सुनी है”।

modi laugh

राज्यसभा का हॉल फिर हंसी से गूंज उठा लेकिन इस बार रेणुका जी नहीं पर पूरा सदन ठहाके लगा रहा था। प्रधानमंत्री के सुपरपंच पर सत्तापक्ष तो पेट पकड़कर हंस रहा था लेकिन साथ ही विपक्ष के नेता भी खूब हंस रहे थे। ऊपर तस्वीर में देखा जा सकता है कैसे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से लेकर सभी पुरूष नेता खूब ठहाके लगा रहे हैं साथ ही निर्मला सीतारमण और उमा भारती भी मुस्करा रहे हैं।

modi laugh

अब ये तस्वीर देखिए रेणुका जी तो खूब गुस्से में तिलमिलाई दिख रही हैं लेकिन जोक इतना जबरदस्त था कि मनमोहन सिंह भी खूब हंस रहे हैं। इधर प्रमोद तिवारी चिंदबरम जी को जोक समझाते भी दिखाई दिए। और बाकि लोग भी खूब हंस रहे हैं।

राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी के जोक और उस पर आए हंसी के सैलाब पर ट्वीटर और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया आई। रेणुका चौधरी जी ने इसे महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी से बताया जिसका कई लोगों ने समर्थन किया जबकि कई लोगों ने बचकनी हंसी के लिए रेणुका जी को ही दो बातें सुना दी। कई लोगों ने कहा प्रधानमंत्री को किसी नेता पर भी ऐसी पर्सनल टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। तो किसी ने कहा कि प्रधानमंत्री की सोच ही ऐसी है कि इस तरह का बयान कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। बीजेपी नेताओं ने प्रधानमंत्री को डिफेंड किया और स्मृति ईरानी ने रेणुका चौधरी जी को कहा कि सदन में सही व्यवहार रखें।

प्रधानमंत्री पर सवाल उठाना एक हद तक सही भी है लेकिन नैतिकता की बीन बजाने से कोई दूध का धुला नहीं हो जाता है। रेणुका चौधरी के बचकाने व्यवहार के जवाब में पीएम मोदी के सेंस ऑफ ह्यूमर का इस्तेमाल करना हल्के मजाक के तौर पर देखा जाना चाहिए। और साथ ही रेणुका चौधरी जी की हंसी को भी उसी तरह देखना पड़ेगा और उसे भी मजाक के तौर पर देखें और पूरे मामले को नज़रअंदाज़ करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीरता थोप देना सही नहीं होगा। देश का प्रधानमंत्री अगर गंभीर हो जाएगा तो देश को उसका अंजाम भुगतना पड़ सकता है। इंदिरा गांधी भी खूब गंभीर थी जिसका अंजाम देश ने 1975 में आपातकाल देश ने देखा। इतना गुस्सा एक साथ देख लिया कि सब चुप हो गए। वैसे ही कांग्रेस के 10 साल के शासन में मनमोहन सिंह की हंसी भी नहीं देखी गई सेंस ऑफ ह्यूमर के क्या ही कहने।

प्रधानमंत्री से कई लोगों को नफरत हो गई है लेकिन राज्यसभा में जो एकता ठहाके लगाते समय सभी नेताओं ने दिखाई वैसे भी आप हंसे और इतनी छोटी सी बात के लिए पीएम मोदी को नैतिकता आईना दिखाने का कोई मतलब ही नहीं बनता।

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