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PNB घोटाला – जानिए क्या है LoU का खेल ?

नीरव मोदी एक ऐसा नाम बन गया है जिसको इन दिनों मीडिया और सोशल मीडिया का पूरा ध्यान इन दिनों मिल रहा हैा। PNB की 11 हज़ार करोड़ से ज्यादा की उधारी लेकर डायमंड कारोबारी नीरव मोदी के विदेश भाग जाने के बाद घोटाले का खुलासा हुआ। जिसके बाद हरकत में आई जांच एजेंसियों ने छापेमारी शुरू की और नीरव मोदी के आलीशान ज्वैलरी शोरूम से लेकर कंपनी के दफ्तरों से कई हज़ार करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली गई।

नीरव मोदी के अलावा मामले में मेहुल चौक्सी भी आरोपी हैं जो गीतांजली ज्वैलर्स के मालिक हैं। दोनों कंपनियों को मिलाकर लगभग साढ़े 5 हज़ार करोड़ की संपत्ति जब्त करने का दावा जांच एजेंसियों ने किया है।

सारा मामला LoU से जु़ड़ा हुआ है। जांच में ये बात सामने आने की खबर है कि LoU यानि लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग यूपीए-2 सरकार में यानि 2011 से जारी हो रहे थे। और कांग्रेस का दावा है कि 2017 में कई LoU को रिन्यू किया गया था।

अब ये बात भी सामने आती है कि LoU कौन जारी करता है ? पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी/PNB) के तीन अधिकारियों को मामले में गिरफ्तार किया गया है और कई कर्मचारियों का सस्पेंड किया जा चुका है। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने गलत तरिके से LoU जारी किए थे। जिसके बाद मुंबई में पीएनपी की ब्रैडी हाउस ब्रांच को सील भी कर दिया गया है।

लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानि LoU एक तरह का बैंक गारंटी होती है जो बैंक किसी भी लेनदेन को पूरा करने के लिए जारी करती है और ये एक उधार की तरह होता है जिसपर बैंक ब्याज भी लेती है। ज्यादातर बड़ी कारोबारी डील में LoU का इस्तेमाल होता है यानि किसी कारोबारी को अगर कोई समान किसी से खरिदना है तो वो बैंक से LoU बनवाकर जिस कारोबारी से समान लेना उसे देता है जिसके बदले बैंक वो रकम उस कारोबारी को सीधे पहुंचा देती है। लेकिन LoU जारी करवाने वाले यानि खरीददार कारोबारी को लोन की तरह अपनी संपत्ति का ब्यौरा बैंक को देना होता है और अगर कारोबारी पैसा बैंक को नहीं दे पाता है तो बैंक संबंधित संपत्ति को जब्त कर सकती है।

अब सवाल ये उठता है कि LoU पर घोटाला कैसे हुआ। पीएनबी के बैंक अधिकारियों ने बिना जरूरी संपत्ति होते हुए भी नीरव मोदी को LoU जारी किए थे यानि की भ्रष्ट बैंक अधिकारियों को इसके बदले रिश्वत भी दी गई होगी। और आरोप ये भी है कि जिस लेवल के अधिकारी को LoU जारी करने का अधिकार है उससे नीचे के अधिकारी ने LoU जारी किए थे। दावा किया जा रहा है कि रिश्वत की रकम भी अधिकारियों में बांटी गई थी।

LoU सिर्फ नीरव मोदी के लिए नहीं देश के सभी बड़े कारोबारियों के लिए जारी किए जाते है क्योंकि कारोबारी लेनदेन में विश्वास ना के बराबर होता है। अगर किसी कारोबारी ने कोई समान खरिदना है और अगर खरीदा हुआ समान सही नही निकला तो उसे नुकसान हो सकता है। लेकिन LoU के केस में समान सही ना होने की स्थिति में बीच में ही डील कैंसिल की जा सकती है वो भी बिना नुकसान के, क्योंकि LoU के केस में बैंक किश्तों में पैसा जारी करता है और अगर खरीदा हुआ समान सही नहीं है तो डील कैंसिल होने की स्थिति में बैंक सिर्फ जारी किया गया पैसा ही वसूलेगा LoU का पूरा पैसा नहीं वसूला जाएगा।

LoU के जारी पैसे को लौटाने के लिए LoU जारी करवाने वाले व्यक्ति को तय समय सीमा में पैसा लौटाना पड़ता है। साथ ही उस समय सीमा बढ़ाया भी जा सकता है यानि कि LoU को रिन्यू भी कराया जा सकता है। और ये बात सामने आई है कि नीरव मोदी को जारी किए गए LoU 2017 में रिन्यू किए गए थे।

इस घोटाले से ये बात समझी जा सकती है कि बैंक अधिकारियों ने बड़े स्तर पर रिश्वत ली और जिसकी वजह से PNB 11000 करोड़ रूपये की चपत लगी। और अब जब सरकार और जांच एजेंसियां हरकत में हैं तो ये बात भी सामने आई है कि नीरव मोदी ने पीएनबी को लेटर जारी कर बैंक का पैसा नहीं चुकाने की चुनौती भी दे ़़डाली है।

अब देखना होगा कि पीएनबी के हक के लिए भारत सरकार विदेश से नीरव मोदी को वापस लाने और उसके पैसे वापस लौटाने के लिए क्या कदम उठाती है।

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