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बुंदेलखंड को सुपर सौगात- बीहड़ में बनेगा डिफेंस हब

बुंदेलखंड का नाम सुनते ही याद आता है टीवी चैनलों पर आने वाले बंजर ज़मीन और बीहड़ पड़ा पूरा इलाका। बुंदेलखंड में घोर गरीबी भी टीवी पर खूब दिखाई जाती है। पानी की कमी और सूखा पड़ जाने पर देश से अलग कटा हुआ ये इलाका कभी किसी की निगाह में नहीं आता। लेकिन बुंदेलखंड की विकास के लिए तड़प और प्यास अब खत्म होने जा रही है। बुंदेलखंड के बीहड़ में भारत सरकार डिफेंस इंडस्टियल कॉरिडोर बनाने जा रही है।

यूपी में बीजेपी की सरकार बनने के बाद पहले इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने ये बड़ा ऐलान किया। भारत सरकार की ओर से देश में दो इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाए जाएंगे लेकिन इनमें से एक अब यूपी में बनेगा लेकिन इसमें भी दिलचस्पी वाली बात ये है कि इसका बड़ा हिस्सा बुंदेलखंड में होगा। सालों से यूपी में आने वाली सरकारें बुंदेलखंड को विकसित करने के दावे करती रहीं लेकिन बुंदेलखंड और यहां के लोगों की किस्मत जैसे उनके साथ नहीं थी। अबकी बार बीजेपी ने भी वादा किया और अब बुंदेलखंड को सच में विकास की सौगात दी गई है।

पीएम मोदी ने बुंदेलखंड में 20 हजार करोड़ रुपये का इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाये जाने की घोषणा की है। यूपी के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक बुंदेलखंड के लिए प्रस्तावित इस योजना से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा। इसमें 20000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 2.5 लाख लोगों को रोजगार मिलेने की संभावना लगाई जा रही है। इस योजना में आगरा, कानपुर, लखनऊ, झांसी और चित्रकूट तक एक डिफेंस कॉरिडोर का निर्माण होगा।

बुंदलखंड में विकास के वनवास पर एक नज़र- (SOURCE-hindi.indiawaterportal.org/node/9088

मध्य प्रदेश के छतरपुर, दमोह, दतिया, पन्ना, सागर, टीकमगढ़ एवं उत्तर प्रदेश के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, झांसी, जालौन, ललितपुर महोबा जिलों को बुंदेलखंड में गिना जाता है। यह क्षेत्र भारत के सर्वाधिक पिछड़े इलाकों में से एक है। काफी अरसे से बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग की जा रही है।

रोजगार के साधनों के अभाव तथा कृषि पर अत्यधिक निर्भरता के कारण यहां के लोग पलायन को मजबूर हैं। यहां औसतन एक लाख की आबादी पर एक फैक्टरी है। हाल ही में विश्व बैंक ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है, जिसका उद्देश्य गरीबी के कारकों का पता लगाना था। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम तथा पश्चिम बंगाल के 300 गांवों के सर्वेक्षण के बाद इस रिपोर्ट में गरीबी के तीन प्रमुख कारण बताए गए, विवाह, बीमारी और बंटवारा।

यही बुंदेलखंड की गरीबी की भी वजह है। यहां विवाह को आज भी व्यापार की दृष्टि से देखा जाता है। कम पढ़े-लिखे लड़कों का भी ज्यादा दहेज बेटियों के पिताओं को जमीन बेचने को मजबूर करता है। बीमारी के कारण खर्चों की पूर्ति न कर पाने के कारण लोग गरीबी के दुश्चक्र में फंसते हैं। इसी तरह बंटवारे के कारण किसी समय के जमींदार आज छोटे-छोटे काश्तकारों के रूप में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। चूंकि छोटी काश्तों की उत्पादकता कम होती है, इसलिए छोटे-छोटे किसान कृषि के बजाय मजदूरी को आजीविका का साधन चुन लेते हैं, जिसके लिए उन्हें दूसरे प्रांतों में जाना होता है।

((बुंदेलखंड पर रिसर्च-http://hindi.indiawaterportal.org/node/9088))

अब जबकि भारत सरकार ने डिफेंस इंडस्ट्रियल एरिया को यूपी में तैयार करने का एलान किया है तो कहा जा सकता है बुंदेलखंड और साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश को इसका लाभ मिलेगा। यूपी में कई साल तक सपा और बसपा की सरकारे रही जिस वजह से राजनीतिक उपेक्षा भी राज्य ने झेली है। अब यूपी और केंद्र दोनों जगह बीजेपी की बंपर बहुमत वाली सरकारें हैं तो इसका फायदा यूपी को मिलता दिख रहा है।

साथ ही इस बात भी नज़र जाती है यूपी से बीजेपी को 80 लोकसभा सीटों में से 71 सीटें मिली थी यानि की 282 कुल लोकसभा सीटों में से लगभग एक तिहाई सीटें बीजेपी को 2014 के चुनाव में यूपी से आई थी। बीजेपी का ध्यान अब इन्हीं सीटों को बरकरार रखने पर है और बाकी सीटों को भी जीतने पर है। क्योंकि ये कहावत भी मशहूर है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से ही जाता है।

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