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लेफ्ट राइट के बीच फंसा त्रिपुरा-लेनिन मूर्ति विवाद और हिंसा का सच क्या है ?

त्रिपुरा में पहली बार भाजपा सरकार बनाने जा रही है। राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बिप्लब कुमार देब 9 मार्च को शपथ लेंगे। लेकिन सरकार की शपथ से पहले ही भाजपा कार्यकर्ता शायद जोश में होश गंवाते दिख रहे हैं।

साउथ त्रिपुरा में भाजपा कार्यकर्ता जैसा कि वायरल वीडियो और समाचर में हैं बुलडोजर लेकर लेनिन की भव्य मूर्ति को तोड़ने पहुंच गए। पुलिस प्रशासन सोता रहा और कथित भाजपा कार्यकर्ताओं ने आराम से जाकर भरे चौराहे पर कम्यूनिस्ट विचारधारा के जनक और महान क्रांतिकारी लेनिन की मूर्ति को धाराशाही कर दिया।

इस घटना के बाद त्रिपुरा के बाकी इलाकों से भी हिंसा की खबरें आई, कहीं सीपीएम दफ्तर में तोड़फोड़ की गई तो कहीं सीपीएम कार्यकर्ताओं से मारपीट भी की गई।

मामले पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यपाल से बात कर जानकारी ली और राज्यपाल तथागत रॉय को कानून व्यवस्थ दुरूस्त करने को कहा है।

इस मुद्दे पर लेफ्ट के साथ बाकी विपक्षी दल भी भाजपा की निंदा कर रहे हैं लेकिन कुछ बीजेपी नेताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं की इस हरकत का समर्थन किया। अपने बयानों के लिए मशहूर सुब्रह्मणयम स्वामी ने कहा कि लेनिन आतंकवादी थे और देश में उनका पुतला नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने सीपीएम को अगर ये गलत लगता है तो अपने पार्टी कार्यालय में ब्लादिमीर लेनिन की मूर्ति लगा ले।

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फोटो-ट्वीटर

भाजपा के त्रिपुरा चुनाव प्रभारी राम माधव ने ट्वीट कर कहा कि लेनिन की मूर्ति रूस में नहीं भारत में पलटाई गई है और साथ में पार्टी के नारे चलो पलटाई को हैशटैग के तौर पर साझा किया लेकिन कुछ देर बाद ट्वीट को डिलीट भी कर दिया गया। बाद में राम माधव की तरफ से कई ट्वीट किए गए जिनमें कहा गया कि सीपीएम दुष्प्रचार कर रही है उन्होंने कहा कि कोई भी सीपीएम कार्यकर्ता अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है जबकि कई बीजेपी नेता घायल अवस्था में अस्पताल में हैं। दूसरे ट्वीट में कहा गया कि स्थानीय विधायक के मुताबिक ये काम लोगों के द्वारा हटाई गई जो सरकार और नगर निगम का काम नहीं है जिस पर कोई केस भी नहीं दर्ज कराया गया और ना ही सीपीएम ने ही इस मामले में कोई केस दर्ज कराया है। साथ ही कहा कि लोगों ने वामपंथ को नकार दिया है और इसीलिए ऐसा किया गया है।

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फोटो-ट्वीटर

लेकिन सीपीएम ने मामले पर तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। कोलकाता की सड़कों पर आज सीपीएम के बड़े नेता मार्च निकालने उतरे और लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने और हिंसा पर विरोध व्यक्त किया।

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कोलकाता में सीपीएम का मार्च (फोटो-सीपीएम का ट्वीटर अकाउंट)

ट्वीटर पर मार्च की तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया गया कि त्रिपुरा में एनडीए की ओर से सीपीएम कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की जा रही है जिसके खिलाफ कोलकाता की सड़कों पर पोलितब्यूरो के सदस्य उतरे। साथ ही ट्वीट में हैशटैग  और  को भी शेयर किया गया।

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फोटो-ट्वीटर

बीजेपी और सीपीएम दोनों अपने अपने तर्क दे रहे हैं लेकिन क्रांतिकारी लेनिन जो अब इस दुनिया में नहीं है जिनके बारे में ये भी कहा जाता है कि भगत सिंह अपनी फांसी से पहले उन्हीं की किताब पढ़ रहे थे, उनकी मूर्ति को इस तरह ढहा देना सही नहीं है। लेफ्ट और राइट जो भी हो महापुरूषों की इज्जत होनी चाहिए। रूस के क्रांतिकारी को इस तरह बेइज्जत करना सही नहीं है। हिंसा के खिलाफ लड़ाई लड़कर भाजपा ने त्रिपुरा की सत्ता हासिल की है लेकिन अब खुद हिंसा के रास्ते पर शायद उतर आई है। पुलिस प्रशासन जिसकी सरकार उसका ही हो जाता है और भाजपा के हाथ में है कि वो किस तरह अपनी छवि बनाती है अराजक और गुंडे वाली कि विकास और प्रगति वाली।

हालांकि सीपीएम की स्थिति भी संदीग्ध है जैसा कि राम माधव ने ट्वीट में कहा कि घायल अस्पताल क्यों नहीं पहुंचे और पुलिस में केस दर्ज क्यों नहीं करवाया गया। जो भी हो लेफ्ट राइट के खेल में जनता ना ही पीसे तो सही है और जनता के हक में खड़े होने वाले लोग को भी शांति बनाए रखनी चाहिए।

 

 

 

 

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