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मूर्ति तोड़ राजनीति से किसका भला हो रहा है ?

त्रिपुरा में भाजपा सरकार बनने के बाद कम्यूनिस्ट विचारधारा के बड़े नेता ब्लादिमीर लेनिन की मूर्ति ढहाने के बाद देशभर में जगह जगह महापुरूषों की मूर्ति तोड़ी जा रही हैं। लेनिन की मूर्ति से शुरू हुई मूर्ति तोड़ क्रांति तमिलनाडू के वेल्लोर में पेरियार, पश्चिम बंगाल में जनसंघ के नेता और बीजेपी के जनक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और मेरठ में बाबा भीमराव साहब अंबेडकर की मूर्ति तोड़ दी गई।

सीरियल मूर्ति तोड़ने की घटनाओं के बीच बीजेपी के ट्वीटर हैंडल पर पीएम मोदी के संदेश को शेयर किया गया जिसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह की घटना को अस्वीकार्य बताया है और कहा है कि घटनाओं के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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फोटो- बीेजेपी का ट्वीटर हैंडल

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी ट्वीट कर ऐसी घटनाओं की निंदा की और कहा कि त्रिपुरा में जो हुआ अगर उसमें कोई बीजेपी कार्यकर्ता शामिल है तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी मूर्ति तोड़ने जैसे काम करने वाले लोगों का समर्थन नहीं करती है।

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फोटो- बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का ट्वीटर हैंडल

बीजेपी भले ही मूर्ति तोड़ कांड को गलत बता रही हो लेकिन बीजेपी के कई नेता खुलकर मूर्ति तोड़े जाने का समर्थन कर चुके हैं। राम माधव और सुब्रमण्यम स्वामी ने मूर्ति तोड़े जाने का समर्थन किया था। लेकिन राम माधव की ओर से मूर्ति तोड़े जाने के समर्थन वाला ट्वीट डिलीट कर दिया गया था।

तमिलनाडू में समाजसेवी इवीआर रामास्वामी पेरियार की मूर्ति को तोड़े जाने की खबर आई। बीजेपी नेता एच राजा पर फेसबुक पर उकसाने वाला पोस्ट करने का आरोप है जिसमें उन्होंने कहा था कि आज लेनिन की मूर्ति गिरी है कल पेरियार की मूर्ति तोड़ जाएगी। जिसके बाद वेल्लोर में कुछ लोगों ने पेरियार की मूर्ति को खंडित कर दिया। इससे मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बीजेपी नेता के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की गई है। घटना के बाद तमिलनाडू में छुटपुट हिंसा और प्रदर्शन हुआ।

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वेल्लोर में पेरियार की खंडित मूर्ति (फोटो-न्यू इंडियन एक्सप्रेस)

इसके बाद कोलकाता में जनसंघ जो बाद में बीजेपी बन गया के बड़े नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति को खंडित करने की खबर आई। बीजेपी की ओर से सीपीएम के कार्यकर्ताओं पर इस घटना का आरोप लगाया गया है।

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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की खंडित मूर्ति (फोटो-ट्वीटर @dibyendumondal)

मामले में कोलकाता पुलिस ने एक महिला समेत 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन सवाल फिर वहीं बनता है कि त्रिपुरा से जो शुरू हुआ अगर उसका पक्ष पहले खुद राज्यपाल और फिर बीजेपी नेता और बीजेपी समर्थकर ना लेते तो शायद बीजेपी के जनक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति के साथ भी तोड़फोड़ और बेअदबी नहीं की जाती। कहा जा सकता है कि जो बीज बोया गया वहीं बाद में बदले की फसल बनकर कोलकात में दिखी।

इन सबके बीच उत्तर प्रदेश के मेरठ में भी बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को भी तोड़ दिया गया। अंबेडकर का आरक्षण की वजह माना जाता है और आरक्षण विरोधी अंबेडकर का भी विरोध करते हैं हालांकि आरक्षण का प्रावधान कुछ समय के लिए किया गया था लेकिन अपनी राजनीति चमकाने के लिए अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया। बाद में इसमें ओबीसी कैटेगरी भी आ गई जिसके बाद जनरल यानि की बाकी सभी बची गैर आरक्षित जाति या समुदाय के लिए सिर्फ 51 फीसदी का कोटा रह गया। यानि कि बाबा साहेब से ज्यादा राजनीतिक दल आरक्षण के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन मेरठ में गुस्सा अंबेडकर की मूर्ति पर उतार दिया गया।

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मेरठ में अंबेडकर की मूर्ति को तोड़ दिया गया (फोटो-याहू न्यूज इंडिया)

हालांकि हिंसा को टालने के लिए प्रसाशन की ओर से नई मूर्ति एक दिन के अंदर लगा दी गई लेकिन अभी तक मूर्ति ढहाने के दोषियों की पहचान नहीं हो पाई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

कथित बीजेपी कार्यकर्ताओं की त्रिपुरा में ओछी हरकत के बाद देशभर में महापुरूषों की मूर्ति निशाना बनाई जा रही हैं। देश में हर किसी की अपनी विचारधारा हो सकती है लेकिन मूर्ति तोड़ना और हिंसा भड़काना लोकतंत्र में मान्य नहीं है।

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