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कर्नाटक में सियासी नाटक शुरू- तारीखों के एलान से मंदिरों तक सियासी दौड़

देश के दक्षिण राज्य कर्नाटक में चुनावी बिगुल बज चुका है। मई की 12 तारीख को एक चरण में 225 सीट पर वोटिंग होगी और 15 मई को यानी महज 3 दिन में नतीजों का एलान हो जाएगा।

हालांकि चुनाव की तारीख ही विवाद का कारण बन गई है। चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऑफिसियल घोषणा से पहले बीजेपी के आईटी सेल हेड अमित मालवीय, कांग्रेस के कर्नाटक प्रदेश सोशल मीडिया सेल हेड के ट्वीटर अकाउंट और कुछ समाचार चैनलों ने तारीख बता दी थीं। चुनाव आयोग ने इस मामले में एक जांच कमेटी का गठन किया है हालांकि ये जांच कमेटी भी सवालों के घेरे में है क्योंकि आयोग की और से जारी आदेश की कॉपी में बीजेपी आईटी सेल हेड अमित मालवीय का नाम नहीं है।

फोटो- फेसबुक

चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं लेकिन इस सबके बीच जमीन पर चुनाव की तैयारियां चल रही है।

फोटो- ट्वीटर @INC India

सत्ताधारी कांग्रेस जिसके पास कर्नाटक अकेला बड़ा राज्य बचा है वो किसी भी हालत पर पार्टी के अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद कर रही है। क्योंकि राज्य में देश का सबसे हाईटेक सिटी बैंगलोर भले ही हो लेकिन रूरल इलाकों में अब भी तकनीक नहीं है और लोग अभी भी जाति देखकर वोट करते हैं।

शायद कांग्रेस पार्टी ने भी अंग्रेजों की बांटो और राज करो की नीति अपनाई है तभी तो राज्य के सबसे बड़े वोटबैंक लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा दिए जाने पर सिद्धारमैय्या सरकार ने मुहर लगा दी है।

फोटो- ट्वीटर @INC India

राहुल गांधी भी हिंदुत्व के एजेंडे का बीजेपी को फायदा पहुंचने से रोकने की पूरी कोशिश कर रहें है तभी तो राज्य के करीब आधा दर्जन मंदिरों का दौरा कर चुके हैं और चुनाव से पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और जाने माने वकील कपिल सिब्बल को भी बाबरी मस्जिद केस छोड़ने को कहा गया जिसके बाद सिब्बल अब बाबरी मस्जिद केस में सुन्नी वक्फ बोर्ड की पैरवी नहीं करेंगे।

फोटो- ट्वीटर @INC India

हालांकि बीजेपी भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में है। पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में येदुरप्पा को भ्रस्टाचार के आरोप के बाद को बाहर कर दिया था जिसकी वजह से पार्टी सत्ता से बाहर हो गई थी लेकिन लोकसभा चुनाव में लिंगायत समुदाय से आने वाले येदुरप्पा बीजेपी में वापस आए और बीजेपी ने राज्य की 28 में से 14 सीट जीती थी।

हालांकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दौरान ऐसी जुबान फिसली कि उन्होंने मौजूदा सिद्धारमैया सरकार की जगह पूर्व येदुरप्पा सरकार को भ्रस्टाचार की रेस में फर्स्ट आने वाली सरकार बता दिया। बीजेपी अध्यक्ष ने बाद में बयान ठीक किया लेकिन ये बयान वायरल जरूर हो गया।

चुनाव में अभी एक महीने का समय है और इस बीच प्रधानमंत्री मोदी भी प्रचार का जिम्मा संभालेंगे। बीजेपी सिद्धरमैया सरकार के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर चुनाव प्रचार कर रही है।

कर्नाटक के इस नाटक में अभी कई मोड़ आएंगे जहां जबरदस्त ड्रामा भी होगा और नमक मिर्च भी तो आप भी राजनीति का आनंद लीजिए लेकिन अगर आप वोट डालने जाए तो ड्रामे से ज्यादा अपनी जरूरत को तवज्जो दें।

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