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निर्भया से कठुआ में 8 साल की मासूम तक- सख्त कानून के बाद भी क्यों नहीं सजा का डर ?

पूरे देश को झकझोर देेने वाली रेप की घटनाएं समय समय पर सामने आती रहती हैं। साल 2012 में निर्भया के साथ हुई गैंगरेप और शरीर के साथ हुई बर्बरता अभी सबके मन में है लेकिन कठुआ में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप, वो कई दिन तक, कई लोगों के द्वारा, सच में सवाल उठता है कि 2012 की क्रांति के बाद आए सख्त कानून के बाद भी क्या देश में कोई बदलाव आया है कि नही?

कठुआ में जो हुआ वो बहुत ही दर्दनाक है, आठ साल की बच्ची अपने पालतु पशुओं को चराने जंगल गई थी वहीं से उसे आरोपियों ने किडनैप किया। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक बच्ची को जनवरी में एक हफ्ते तक कठुआ जिला स्थित एक गांव के एक मंदिर में बंधक बना कर रखा गया था और उसके साथ छह लोगों ने बलात्कार किया था। चार्जशीट में बताया गया कि बच्ची को नशीली दवाई देकर लगातार उसका रेप किया गया।

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अब तक इस केस में करीब 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें 2 स्पेशल पुलिस ऑफिसर, एक हेड कॉन्सटेबल, एक सब इंस्पेक्टर, एक कठुआ निवासी और एक नाबालिग शामिल है।

पूरे देश में कठुआ गैंगरेप को लेकर काफी गुस्सा है, राहुल गांधी ने भी दिल्ली में बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए मार्च निकाला था। देश के अलग-अलग हिस्सों में आम लोगों ने भी सड़कों पर उतरकर, कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध व्यक्त किया है। बॉलीवुड के सितारों ने भी कठुआ गैंगरेप केस पर कैंपेन चलाया है जिसमें करीना कपूर, सोनम कपूर, हूमा कुरैशी जैसी अभिनेत्रियां बच्ची के लिए इंसाफ की मांग कर रही हैं।

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यूपी के उन्नाव में भी देश की सत्ताधारी बीजेपी के विधायक पर रेप के आरोप लगे और सियासी दबाव, पीड़ित के मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद आखिरकार विधायक को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन उन्नाव की घटना में राज्य की बीजेपी सरकार रेप जैसी घटनाओं पर अपनी गंभीरता को लेकर सवालों में आ गई है।क्योंकि कई दिनों तक मामला पुलिस के पास था और विधायक की गिरफ्तारी तक नहीं की गई थी। हालांकि मामला सीबीआई के अधीन होने और हाईकोर्ट के गिरफ्तारी के आदेश के बाद विधायक को गिरफ्तार किया गया।

पीएम मोदी ने कहा- दोषियों को सजा होगी-

कठुआ और उन्नाव की रेप की घटनाओं पर बोलते हुए पीएम ने कहा “पिछले दिनों से जो घटनाएं चर्चा में हैं वो किसी भी सभ्य समाज में शोभा नहीं देती हैं, ये शर्मनाक है. एक समाज के रूप में, एक देश के रूप में हम सब इसके लिए शर्मसार हैं। पीएम ने साथ ही कहा ‘देश के किसी भी राज्य में, किसी भी क्षेत्र में होने वाली ऐसी वारदातें, हमारी मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देती हैं. पर मैं देश को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि कोई अपराधी नहीं बचेगा, न्याय होगा और पूरा होगा. हमारी बेटियों को न्याय मिलकर रहेगा’

देश में क्या है 2012 की क्रांति के बाद की तस्वीर-

  • साल 2013 में 33,707 रेप के मामले सामने आए। इनमें करीब 13.1 फीसदी यानि 4,427 मामलों में रेप पीड़ित 14 साल कम उम्र की थीं। 26.3% (8,877) पीड़ित टीनेज थीं। 46.1% (15,556) पीड़ित 18-30 साल की उम्र के बीच थीं। 0.7% (256) पीड़ित 50 साल की उम्र के ऊपर भी थीं।
  • साल 2014 में 36,735 रेप के मामले सामने आए थे। सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश से (5,076) फिर राजस्थान (3,759), फिर उत्तर प्रदेश से (3,467) जो कि तीसरे नंबर पर था।
  • साल 2015 में 34,651 रेप के मामले सामने आए। इस बार भी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 12.7% (4,391) मामले थे।
  • साल 2016 में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा मामले सामने आए। 38,947 रेप के मामले 2016 में दर्ज कराए गए।इस बार भी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा (4882) मामले थे। हालांकि यूपी(4816) और महाराष्ट्र (4189) में भी करीब करीब उतने ही मामले थे।

(NCRB)

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क्या किया जा सकता है-

सख्त कानून है, फांसी तक की सजा का प्रावधान है। जुवेनाइल को भी कड़ी सजा मिल सकती है। फिर भी कुछ हो क्यों नहीं पा रहा है।

  • सुस्त न्याय व्यवस्था भी इसके लिए जिम्मेदार है हालांकि रेप के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का प्रावधान है लेकिन हर मामले में ऐसा नही होता है। कई मामलों में सुनवाई कई साल तक चलती है और रेप पीड़ित की न्याय की आस लगभग खत्म सी हो जाती है।
  • पुलिस प्रशासन को ठीक करने की आवश्यकता है। रेप जैसे मामलों में पुलिस ढिलाई बरतती है और कुछ मामलों में आरोपियों से साठ-गांठ तक के मामले सामने आते हैं। पुलिस से भ्रष्टाचार खत्म किया जाएगा तो हो सकता है बड़ा बदलाव देखा जा सके।
  • समाज भी रेप पीड़ित और उसके परिवार को अलग नजर से देखता है। रेप पीड़ित की जिंदगी बर्बाद हो जाती है समाज के इस रवैये की वजह से, अगर समाज पीड़ित को पीड़ित की तरह देखे तो कुछ हो सकता है क्योंकि अपराध या गलत काम पीड़ित ने नहीं बल्कि रेपिस्ट और आरोपियों ने किया है।
  • रेप पीड़ितों के लिए भारी भरकम मुआवजा होना चाहिए। अगर समाज नहीं भी सुधरे तो वो सर उठाकर अपनी ज़िंदगी जी सके। लगभग 1 करोड़ तक की राशि राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को मिलकर तय करनी चाहिए।
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