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‘आधार’ को निराधार बताकर क्या होगा- संस्थाओं पर जनता का विश्वास खत्म करने की साजिश ?

भारत सरकार जहां देश में विभिन्न सेवाओं में पारदर्शिता लाने के लिए आधार को अनिवार्य कर रही है वहीं सरकार की इस पहल के समानांतर आधार कार्ड के बढ़ते इस दायरे के खिलाफ एक कैंपेन चलाया जा रहा है।

यूपीए सरकार में वित्तीय सेवाओं में पारदर्शिता लाने के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य किया गया था जिसका फायदा आज मिल रहा है। कालेधन पर नकेल कसी जा रही है क्योंकि पैन कार्ड के बिना खाते ही नहीं खुल रहे हैं और एक से अधिक खातों में कालेधन को ठिकाने लगाना लगभग खत्म हो गया है।

लेकिन मोदी सरकार आने के बाद आधार कार्ड का एक पहचान के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए चलाया जा रहा सरकार का अभियान के भविष्य का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

supreme court

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में यह आशंका जताई गई है कि आधार से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल चुनाव के दौरान किया जा सकता है। पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा कि देश में कोई डेटा सुरक्षा कानून नहीं है, ऐसे में लोगों का डेटा सुरक्षित है यह कैसे कहा जा सकता है। सुनवाई के दौरान आधार डेटा के चुनाव में इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। पीठे के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि ये वास्तविक आशंका है कि उपलब्ध आंकड़े किसी देश के चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

UIDAI की ओर से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा,’डेटा के साझा होने का कोई डर नहीं है। आधार के तहत डेटा का संग्रह एक एटम बम नहीं है। इस तरह का डर याचिकाकर्ताओं की तरफ से फैलाया हुआ डर मात्र है…हमनें यह पहले ही सुनिश्चित किया है कि डेटा सुरक्षित रहे।’

UIDAI की ओर से ये भी कहा गया है कि जैसे ही डेटा सिस्टम में आता है तो वो एंक्रिप्ट है जाता है यानि कि वो उसके बाद पासवर्ड के बाद ही खुल सकता है। इसलिए डेटा लीक हो ही नहीं सकता।

https://myindiamygovernment.com/2018/03/14/आधार-बनवाना-हुआ-मुश्किल-द/

आधार कार्ड में लोगों के अंगूठे के निशान भी लिए जाते हैं जिसको लेकर भी काफी विवाद है कि लोगों के बॉयमैटरिक लेकर सरकार कुछ गलत तो नहीं कर देगी। लेकिन सरकार को संस्था के साथ जोड़कर देखना सही नहीं है। UIDAI एक स्वतंत्र संस्था है और कांग्रेस के कार्यकाल में लाई गई इस योजना से पूरे देश को एक पहचान से जोड़ने की मुहीम चलाई जा रही है।

aadhar 1

कहां कहां अनिवार्य किया गया है आधार कार्ड-

  • पैन कार्ड
  • मोबाइल नंबर
  • बैंक अकाउंट
  • म्युच्यूल फंड
  • इंश्योरेंस पॉलिसी
  • पोस्ट ऑफिस स्कीम
  • ईपीएफओ का UAN नंबर
  • मृत्यु प्रमाण पत्र

हालांकि सरकार की ओर से इन सभी सेवाओं से आधार लिंक करानी की डेडलाइन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है जो कि कई बार बदलने के बाद 31 मार्च 2018 थी।

इसके अलावा कुछ ऐसे मामले भी जहां आधार कार्ड की मांग की जा रही है

  • स्कूल एडमिशन
  • पुलिस FIR

हालांकि देखा जाए तो देश की कई संस्थाएं आप से जानकारी मांगती हैं। बच्चे के पैदा होने पर हॉस्पिटल वाले माता-पिता की, स्कूल जाने पर बच्चे की भी वही फिर कॉलेज में और उससे आगे वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट और फिर नौकरी लगने पर ऑफिस रिकॉर्ड के लिए कई पन्नों का जॉइनिंग फॉर्म और उसके बाद ईपीएफओ में पंजीकरण के लिए भी कई जानकारी देनी होती हैं। अब इतनी सारी संस्थाओं पर अगर डेटा लीक कराने का शक किया जाए तो क्या होगा देश की व्यवस्था ही ठप पड़ जाएगी।

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आधार कार्ड भी देश की निष्पक्ष संस्था के अधीन आता है तो उस पर इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं शायद इसीलिए कि सरकार ने उसे कई योजनाओं से जोड़कर पारदर्शिता लाने की पहल की है।

हालांकि ये भी भरोसा नहीं की जा सकती कि भारत सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दल चुनावों में ऐसा नहीं कर सकते लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा बनाकर ही चलना पड़ता है तभी लोकतंत्र भी सुरक्षित रहता है।

https://myindiamygovernment.com/2018/03/26/डाटा-चोरी-बीजेपी-करा-रही-ह/

वैसे तो इलेक्शन कमीशन पर भी सवाल उठते हैं लेकिन क्या कांग्रेस कई राज्यों में नहीं हारी और देश में कई साल राज करने के बाद भी वो 44 सीटों तक नहीं पहुंच गई। ईवीएम पर भी सवाल उठते हैं लेकिन क्या ऐसे नहीं हो सकता कि देश की जनता किसी एक पार्टी को हर राज्य में सत्ता दे दे।

आधार कार्ड का मुद्दा संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा कम और राजनैतिक मुद्दा ज्यादा लगता है। विदेशी कंपनी फेसबुक अगर लोगों की जानकारी लीक करती है तो आधार कार्ड की जानकारी भी देश की संस्था लीक कर देगी ये कहना बहुत ही गलत है। हालांकि सरकार कुछ भी कर सकती है लेकिन संस्था को शक के दायरे में लेना शायद सही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट मामले पर सुनवाई कर रहा है और आगे देखना होगा कि क्या होता है।

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