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विकास की ‘एक्सप्रेसवे’ रफ्तार- आम आदमी के घर तक सड़कों पर काम कब होगा ?

जी हां देश में इस वक्त एक्सप्रेसवे बनाने की होड़ से लग गई है। फर्राटा रफ्तार भरने के लिए अब सिर्फ गिने चुने एक्सप्रेसवे ही नहीं लेकिन बहुत सारे प्रोजेक्ट इस वक्त देश में चल रहे हैं और आने वाले समय में कई राज्य सरकारों और केंद्र सरकार की ओर से एक्सप्रेसवे बनाने का एलान किया गया है।

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लेकिन बड़ा सवाल ये है कि देश की आम जनता जो मैट्रो शहरों में गलियों, सरकारी आवास-विकास कालोनियों में, फ्री-होल्ड कालानियों में, बड़े पॉस इलाकों में, गांवों में रहती है उसको अच्छी सड़क कब मिलेगी।

पहले एक नजर देश के भारी भरकम रकम से तैयार होने वाले एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर…

दिल्ली मुंबई के बीच बनेगा एक्सप्रेसवे

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केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर कहा गया कि दिल्ली से मुंबई तक एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। दिल्ली से सटे गुड़गांव से शुरू होकर मुंबई के बाहरी इलाके तक हाइवे जाएगा। बतौर मीडिया रिपोर्टस फिलहाल दिल्ली मुंबई के बीच मौजूद नेशनल हाइवे 8 की दूरी साढे 14 सौ किलोमीटर है जो एक्सप्रेसवे बनने के बाद साढ़े बारह सौ किलोमीटर रह जाएगी।

गौर करने वाली बात ये है कि नेशनल हाइवे गुड़गांव से होते हुए जयपुर से अहमदाबाद होते हुए मुंबई जाता है लेकिन नया एक्सप्रेसवे अलग रूट से मुंबई पहुंचेगा जो होगा रेलवे का कोटा-रतलाम-वडोदरा वाला रूट, इस रूट से राजधानी एक्सप्रेस मुंबई जाती है। हालांकि इस एक्सप्रेसवे से सिर्फ दिल्ली-मुंबई आने जाने वालों की ही नहीं लेकिन रूट पर पड़ने वाले शहरों के विकास पर भी असर होगा।

बतौर मीडिया रिपोर्टस ये एक्सप्रेसवे गुड़गांव(हरियाणा)-मेवात(हरियाणा)-कोटा(राजस्थान)-रतलाम(मध्य प्रदेश)-दाहोद(गुजरात)-गोधरा(गुजरात)-वडोदरा(गुजरात)-सूरत(गुजरात)-मुंबई इस रूट को फॉलो करेगा। इस बीच में मेवात और दाहोद जो कि काफी पिछड़े इलाके हैं वहां विकास होगा और उद्योग भी इन इलाकों तक पहुंचेंगे। वहीं कोटा, रतलाम और गोधरा को भी इसका फायदा पहुंचेगा। सूरत और वडोदरा कनेक्टिविटी मुंबई से अच्छी हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट पर करीब एक लाख करोड़ का खर्च आएगा और दिसंबर से इसका काम शुरू हो जाएगा। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के मुताबिक 3 साल में एक्सप्रेसवे बनकर तैयार करने की कोशिश की जाएगी।

दिल्ली के सटे इलाकों को जोड़ते ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे-

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दिल्ली में जाम को खत्म करने के लिए Non-Delhi Destined यानि जो वाहन दिल्ली नहीं बल्कि दिल्ली होते हुए दूसरे राज्य के लिए जाना चाहते हैं उनके लिए भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय दो एक्सप्रेसवे तैयार कर रही है।सोनीपत के कोंडली से लेकर गुड़गांव के मानेसर होते हुए पलवल के बाहरी इलाके तक वेस्टर्न एक्सप्रेसवे है। कोंडली से लेकर बागपत के पास से निकलते हुए गाजियाबाद से ग्रेटर नोेएडा और फिर पलवल तक का इस्टर्न एक्सप्रेसवे है।

वेस्टर्न एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा जो गुड़गांव के मानेसर को पलवल के बाहरी इलाके से जोड़ता है वो पहले से ही चालू है लेकिन मानेसर से सोनीपत के कोंडली तक अभी काम चल रहा है। वेस्टर्न एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 135.5 किलोमीटर है।

इस्टर्न एक्सप्रेसवे जो हरियाणा के सोनीपत को सीधे गाजियाबाद से जोड़ देगा और फिर वहीं से ग्रेडर नोएड़ा और पलवल तक जाया जा सकेगा। ये पूरा हाइवे लगभग बनकर तैयार है और प्रधानमंत्री इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को करेंगे। ये एक्सप्रेसवे भी करीब 135 किलोमीटर का है।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे-

देश की राजधानी और आस-पास के इलाकों को जाम से मुक्ति देने के लिए एक और बड़ा प्रोजेक्ट है दिल्ली से यूपी के गाजियाबाद से होते हुए मेरठ तक एक्सप्रेसवे। इस हाइवे को चार हिस्सों में पूरा किया जा रहा है। बतौर सड़क परिवहन मंत्रालय इस एक्सप्रेसवे के पहले पार्ट जो कि दिल्ली के निजामुद्दीन से यूपी गेट तक है वो बनकर तैयार हो चूका है और 29 अप्रैल को उसका भी लोकार्पण प्रधानमंत्री करेंगे। ये एक्सप्रेस वे अभी NH-24 के तौर पर चालू है लेकिन बाद में ये दिल्ली से मेरठ तक एक्सप्रेसवे में तब्दील हो जाएगा।

सबसे बड़ी बात है कि दिल्ली से गाजियाबाद के डासना तक हिस्सा चौदह लेन का होगा। ये भारत का सबसे चौड़ा एक्सप्रेसवे होगा। हालांकि डासना के बाद आठ लेन का एक्सप्रेसवे मेरठ तक जाएगा और हापुड़ का बाद हिस्सा NH-24 रहेगा जो कि लखनऊ तक जाता है। एक्सप्रेसवे की कुल दूरी 96 किलोमीटर है।

बिजू एक्सप्रेसवे(उड़ीसा)-

बिजू एक्सप्रेसवे लगभग साढ़े छह सौ किलोमीटर का एक्सप्रेसवे जो कि उड़ीसा की नवीन पटनायक सरकार बना रही है। इसका एक हिस्सा जो कि 163 किलोमीटर लंबा है वो 13 अप्रैल 2018 को राउरकेला और संबलपुर के बीच खोला जा चुका है। बाकी का हिस्सा मिलाकर कुल खर्च है लगभग 3 हजार करोड़। लेकिन गौर करने वाली बात ये भी है कि एक्सप्रेसवे की चौड़ाई 4 लेन की ही रखी गई है।

मौजूदा समय में चालू बड़े एक्सप्रेसवे

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे

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यूपी का आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे इस वक्त देश का सबसे लंबा चालू एक्सप्रेसवे है। इसकी कुल लंबाई 302 किलोमीटर है।इस एक्सप्रेसवे को समाजवादी पार्टी सरकार ने शुरू कराया था और रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार भी हो गया था जिसका उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में किया था।

यमुना एक्सप्रेसवे

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यमुना एक्सप्रेसवे दिल्ली को आगरा से जोड़ता है। दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा से शुरू होकर आगरा तक जाने वाला एक्सप्रेसवे टूरिस्ट के लिए बहुत लाभदायक है। लगभग 2 घंटे में ग्रेटर नोएडा से आगरा तक पहुंच सकते हैं और उसके आगे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से लखनऊ पहुंच सकते हैं। रास्ते में मथुरा और वृंदावन भी है जिस वजह से इस हाइवे पर सैलानियों की काफी चहल पहल रहती है।इस हाइवे को यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने कार्यकाल में शुरू कराया था हालांकि एक्सप्रेसवे की शुरूआत समाजवादी पार्टी सरकार ने की थी। एक्सप्रेसवे की कुल दूरी लगभग 200 किलोमीटर है।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे

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मुंबई को लगभग सौ किलोमीटर दूर पुणे शहर से जोड़ता है ये शानदार एक्सप्रेसवे। पहाड़ो के बीच से निकलता ये एक्सप्रेसवे बहुत ही सुंदर और भव्य है। इस एक्सप्रेसवे पर कई टनल भी पड़ती हैं। मुंबई से पुणे तक का सफर इस एक्सप्रेसवे की वजह से बहुत ही आनंददायक होता है। पहाड़ो के नजारे वाकई भव्य और देखने लायक होते हैं।

आउटर रिंग रोड़, हैदराबाद

हैदराबाद शहर के चारों तरफ फैला ये एक्सप्रेसवे दिल्ली में बन रहे ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का मिक्स वर्जन है। हैदराबाद पार करने वाले सभी वाहन इसी हाइवे का इस्तेमाल करते हैं। ये करीब 158 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे है।

जयपुर-अजमेर एक्सप्रेसवे

जयपुर को अजमेर के किशनगढ से जोड़ता है ये एक्सप्रेसवे। इसकी लंबाई करीब 90 किलोमीटर है। दिल्ली से मुंबई को जोड़ने वाले हाइवे NH 8 का एक हिस्सा भी है।

आने वाले समय के लिए करीब 20 एक्सप्रेसवे और बनाए जाएंगे जिन पर अभी काम शुरू तक नहीं हुआ है।

अब बात करते हैं कि उद्योगों और बड़े शहरों के बीच सफर की बात, एक्सप्रेसवे से आस-पास के जिलों का विकास की बात एक तरफ है लेकिन असल बात तो ये है कि क्या आम आदमी को उसके घर तक सड़क मिल पा रही है।

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कहां कहां सड़कें सही हैं (सिर्फ मैट्रो शहर नहीं देश का हर शहर)

  •  प्रशासनिक कार्यालयों के आस-पास
  • शहरों से या बाईपास से गुजरने वाले नेशनल हाइवे
  • पॉश कालोनियों में
  • जिलों के अपनी सरकारी आवास-विकास कालोनियों में
  • सरकारी दफ्तरों और स्टाफ क्वार्टर के आस-पास की जगह
  • मेन मार्केट वाली जगहों पर
  • बड़े गांवों में

कहां कहां नहीं होती अच्छी सड़कें

  • फ्री होल्ड कॉलोनियों में
  • गांवों को शहर से जोड़ने वाली सड़कें
  • छोटे अंदरूनी और पिछड़े गांवो तक

कुछ जगह जहां अच्छी सड़कों की बात की गई है वहां भी सड़कें सही नहीं होती है वो भी कई सालों तक। फ्री होल्ड कॉलोनियों में सालों तक मिट्टी की सड़कें चलती है कभी सालों में सड़कें पार्षद, मेयर से विनती करके लोग बनवा भी लेते हैं तो अगली बाद कब बनेगी पता नहीं। गांवो की सड़कों का तो बुरा हाल है कब काम शुरू होगा और कब खत्म होगा उसमें ही कई साल निकल जाते हैं। पहले बजरी पड़ती है फिर महीनों बाद कुछ काम होता है फिर सालभर में सड़क बनती है। और सड़क टूट गई तो फिर कब बनेगी पता नहीं।

जहां तक कहा जाए तो नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय सही काम कर रहा है। राज्य सरकारों के लोकनिर्माण विभाग भी राज्य के अधीन आने वाली सड़कों पर काम कर रही हैं। लेकिन जनता से जुड़ा मुद्दा ये है कि आम आदमी के घर तक सड़क अच्छी हो ये कौन देखेगा।

शहरों में लोकल एडमिनिस्ट्रिशन दो हिस्सों में बंटा होता है एक जिसकों जनता के चुने पार्षद और मेयर चलाते हैं और दूसरा होता है जिलों के अपने प्राधिकरण जो कि आईएएस अधिकारी और उसके नीचे के अधिकारी और कर्मचारी मिलकर चलाते हैं। इन दोनों के बीच काम को लेकर मतभेद भी रहते हैं। वही एक वजह है कि क्यों गांवों, फ्री होल्ड कॉलोनियों और जिलों के लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के तहत आने वाली सड़कों पर कोई ध्यान नहीं देता है।

सभी राज्य सरकारों को सुनिश्चित करना चाहिए कि स्थानीय प्रशासन शहरों और गांवों में काम कराए।

 

 

 

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