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बच्चों से रेप पर अब सीधा मौत की सजा- जानिए नए अध्यादेश से क्या बदलने वाला है ?

कठुआ रेप केस के बाद जिस तरह का कैंपन चला है बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए और रेप जैसी घटनाओं के खिलाफ कड़ा कानून लाने के लिए वो कामयाब हो गया है। भारत सरकार ने एक अध्यादेश को मंजूरी दी है जिसके तहत अब 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ गैंगरेप पर आजीवन कारावास और उससे भी कही ज्यादा मौत तक की सजा का प्रावधान होगा। इस फैसले की सभी ओर तारीफ हो रही है क्योंकि बच्चों को भी नहीं बख्सने वाले का समाज में रहना बड़ा खतरा है और उसकी मौत ही समाज के लिए जरूरी हो सकती है ताकि बाकी लोग इस घिनौने अपराध को ना दोहरा पाएं।

वहीं 12 साल की बच्ची रेप के केस में कम से कम 20 साल सजा फिर आजीवन कारावास और फांसी तक का प्रावधान है। 16 साल से कम उम्र के बच्चों से गैंगरेप के मामलों में सीधे आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है वहीं 16 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप के मामले में 20 साल तक की सजा फिर आजीवन कारावास तक प्रावधान है। 16 साल के ऊपर अगर किसी के साथ रेप होता है तो अपराधियों को 10 साल तक सजा का प्रावधान किया गया है।

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भारत सरकार की ओर से रेप के मामलों की फास्टट्रैक सुनवाई के लिए भी जरूरी बदलाव करने की तैयारी की जा रही है। अब 2 महीने में रेप केस की जांच पूरी करना जांच टीम के लिए जरूरी हो जाएगा। वहीं कोर्ट में ट्रायल के लिए भी 2 महीने की टाइम लिमिट तय की गई है। वहीं आरोपियों की ओर से की गई अपीलों के निपटारे के लिए भी सरकार की ओर से 6 महीने की डेडलाइन का प्रावधान भी किया गया है।

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टाइम लिमिट के साथ व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए जरूरी प्रावधान सरकार ने किेए हैं। जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना, पीड़ितों की ओर से केस लड़ने लिए सरकारी वकीलों की नियुक्ति की जाएगी। वहीं पुलिस और जांच एजेंसियों की सुविधा के लिए सभी पुलिस स्टेशन और अस्पतालों में फोरेंसिक किट मुहैया कराई जाएगी। रेप मामलों की जांच के लिए जरूरी लोगों की भर्ती भी की जाएगी। हर राज्य और केंद्र शाषित प्रदेश में फोरेंसिक लैब भी बनाई जाएगी। इन सभी कदमों पर 3 महीने में काम शुरू हो जाएगा।

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रेप पीड़ितों की मदद के लिए भी एक सेंटर सरकार हर जिले में खोलने जा रही है।

सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठा तो लिया है जिसमें ना सिर्फ छोटे बच्चों के साथ रेप करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी पर बाकी पीड़ितों के अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन निर्भया रेप केस के बाद भी कानून आया था लेकिन देश में हालात नहीं सुधर पाए थे अब देखना होगा कि क्या होता है।

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आइए एक नज़र डालते हैं 2012 के बाद रेप की घटनाओं के आंकड़ों पर-

  • साल 2013 में 33,707 रेप के मामले सामने आए। इनमें करीब 13.1 फीसदी यानि 4,427 मामलों में रेप पीड़ित 14 साल कम उम्र की थीं। 26.3% (8,877) पीड़ित टीनेज थीं। 46.1% (15,556) पीड़ित 18-30 साल की उम्र के बीच थीं। 0.7% (256) पीड़ित 50 साल की उम्र के ऊपर भी थीं।
  • साल 2014 में 36,735 रेप के मामले सामने आए थे। सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश से (5,076) फिर राजस्थान (3,759), फिर उत्तर प्रदेश से (3,467) जो कि तीसरे नंबर पर था।
  • साल 2015 में 34,651 रेप के मामले सामने आए। इस बार भी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 12.7% (4,391) मामले थे।
  • साल 2016 में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा मामले सामने आए। 38,947 रेप के मामले 2016 में दर्ज कराए गए।इस बार भी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा (4882) मामले थे। हालांकि यूपी(4816) और महाराष्ट्र (4189) में भी करीब करीब उतने ही मामले थे।

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

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