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ओला ड्राइवर मुस्लिम इसलिए कैंसिल की कैब- लेकिन सच एक कुछ और भी है

देश में जो हो रहा है उसका युवाओं पर किस तरह का प्रभाव पड़ रहा है उसका ताजा मामला है ओला कैब का हाल का मामला। अभिषेक मिश्रा ओला कैब बुक करते हैं लेकिन देखते हैं कि ड्राइवर कोई मसूद आलम हैं तो मुस्लिम ड्राइवर होने की वजह से वो उस कैब को कैंसिल कर देते हैं हालांकि उनकी बताई वजह बिल्कुल भी सही नहीं थी।

अभिषेक ने इसकी जानकारी ट्वीटर पर ओला कैब की टीम के साथ शेयर की। इस पर टीम ने जो जवाब दिया वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने कहा भारत देश की तरह हमारी सेवा भी धर्मनिरपेक्ष है इसलिए हम अपने ड्राइवर साझेदारों और उपभोक्ताओं में जाति, धर्म, लिंग और रंग भेद नहीं करते हैं। उन्होंने साथ ही सभी डाइवर साझेदारों और ग्राहकों एक दुसरे को सम्मान देने की बात कही।

अभिषेक की इस पर इंटननेट पर काफी आलोचना हो रही है और लोग उनकी मानसिकता पर सवाल उठा रहे हैं। लोग कह रहे हैं उनकी मानसिकता खराब हो चुकी है और उन्हें इस नफरत को भुला देना चाहिए।

कई लोगों ने अभिषेक मिश्रा को ब्लैकलिस्ट करने की गुजारिश की है ओला कैब वालों से। उनका कहना है कि ऐसे लोगों के साथ सख्त तरीके से निपटना चाहिए।

हालांकि इतनी नफरत बिना वजह नहीं है इसके पीछे अभिषेक ने एक ट्वीट को उसकी मुस्लिमों के प्रति नफरत की वजह बताया। एक ट्वीट में एक लड़की ऊबर कैब को कहती है कि उसके ड्राइवर ने एंग्री हनुमान की तस्वीर गाड़ी पिछले हिस्से पर लगा रखी है जिसकी वजह से वो कैब में नहीं जाएंगी।

ये वो पोस्ट है इसमें महिला कहती हैं कि ये रूद्र हनुमान की तस्वीर हिंदु संगठनों का प्रतीक है जिन्होंने कठुआ रेप के आरोपियों का समर्थन किया था और वो इसलिए अब ऊबर की कैब नहीं इस्तेमाल करेंगी क्योंकि वो अपने पैसों को बालात्कारियों का समर्थन करने वाले को नहीं देना चाहती है।

इसी ट्वीट का गुस्सा था जो अभिषेक मिश्रा ने मुस्लिम ओला कैब ड्राइवर की कैब कैंसिल करके उतारा है। उन्होंने खुद माना है कि ये उनका विरोध करने का तरीका है हालांकि भले ही अलग तरीका हो।

हालांकि ट्वीटर को अभिषेक मिश्रा के खिलाफ शिकायत मिली लेकिन उन्हें कुछ भी ऐसा नहीं लगा जिसके तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

हालांकि अभिषेक का मुद्दा सही है कि रूद्र हनुमान की तस्वीर लगाने पर किसी ड्राइवर की कैब कैसे लड़की ने कैंसिल कर दी लेकिन तरीका गलत ही नहीं बहुत नफरत भरा है। वो इसकी शिकायत ओला कैब से कर सकते थे लेकिन उनका तरीका शायद ऐसा है जो इस तरह की नफरत को और बढ़ा सकती है। अभिषेक मिश्रा को कई लोगों ने सपोर्ट भी किया है लेकिन वहीं कुछ लोगों ने धमकी भी दे रहे हैं। लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का हक लेकिन असभ्य तरीका कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

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