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खोखला विकास सीरीज़ में आज बात प्रवासी भारतीयों की – जो विदेश में नहीं देश में ही प्रवासी हैं

देश में बहुत सारे लोग हैं जो छोटे शहरों से आते हैं या फिर बड़े शहरों से होते हुए भी दूसरे शहरों में नौकरी करते हैं। इनकी संख्या अथाह है। इन लोगों के पास रोजगार तो है और भारी भरकम सैलरी भी हो सकती है लेकिन परिवार इनके पास नहीं होता है। आज हम आपको ऐसे लोगों की जिंदगी से रूबरू कराएंगे और क्यों ये सिलसिला सालोंसाल कई लोगों तक पहुंच रहा है।

महानगरों में प्रवासियों का रोटी-पानी का संघर्ष-

देश के बड़े महानगर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में कई राज्यों के लोग रहते हैं, काम करते हैं, कुछ लोग दूसरे शहरों,गांवो और राज्यों से आकर यहां पढ़ भी रहे हैं। महानगर के इलावा राज्यों की राजधानी, इंडस्ट्रियल हब बन चुके शहरों में भी बड़ी जनसंख्या का प्रवास होता है। इन शहरों में यहां के स्थानीय लोग ना के बराबर होते हैं यहां पर मुख्य आबादी प्रवासी लोगों की होती है। लेकिन इन प्रवासियों में भी कई कैटेगरी हैं।

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  1. पढ़ाई करने वाले छात्र प्रवासी- कई शहरों से लोग महानगरों के नामी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और यहां तक की स्कूलों में पढ़ने के लिए पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में ऐसे छात्र या तो संबंधिक संस्थान के हॉस्टल में रहते हैं या फिर किराये के रूम में। इन छात्रों की लाइफ यहां रोमांचक भी हो जाती है। कई छात्र अमीर या कहें ठीक ठीक परिवार से होते हैं तो उन्हें घर से दूर एक आज़ादी मिलती है जिसका वो मजा भी उठाते हैं फूल मस्ती करते हैं। लेकिन कुछ छात्र गरीब या कहें आर्थिक रूप से असमर्थ परिवार से होते हैं उनके लिए घर से दूर सीमित बजट में पढ़ाई भी करनी है तो साथ में अपने रहने-खाने का भी ख्याल रखना है। कुछ छात्र इसीलिए पार्ट टाइम नौकरी भी करते हैं। हालांकि इस क्षेत्र में सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले लोग भी हैं जो दिल्ली के मुखर्जी नगर और कोटा जैसे बड़े हब में मिल जाएंगे ये लोग भी बड़ा परिश्रम करते हैं वो घर से दूर, लेकिन कुछ कामयाब भी हो जाते हैं लेकिन कुछ को खाली हाथ घर भी लौटना पड़ता है। इन सबके बीच किराए पर मकान देने वाले मकानमालिकों और पीजी चलाने वाले लोगों का खूब फायदा होता है।

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  1. नौकरी करने वाले कुंवारे युवा- पढ़ाई के बाद बड़े शहरों में नौकरी मिलना बड़ी उपलब्धी होती है, क्योंकि छोटे शहरों में या जहां उद्योग नहीं वहां सिर्फ व्यापार ही एक कमाई का जरिया या फिर खेती से ही पेट पाला जा सकता है। अच्छी नौकरी चाहिए तो बड़े शहरों तक जाना पड़ता है। वहीं सरकारी नौकरी भी लगती है तो पोस्टिंग होम टाउन में तुरंत नहीं मिलती है। शुरूआती समय में सभी लोग किराए के घर में ही रहते हैं वहां भी कुछ लोग अकेले नहीं रूम पार्टनर्स के साथ रहते हैं। कुछ लोग होते हैं जो बड़े शहरों में रहे भी, पढ़ाई भी की और नौकरी भी कर रहे हैं, लेकिन कई लोग दूसरे शहरों, राज्यों से आकर बड़े शहरों में नौकरी करते हैं। इन युवाओं में सभी पढ़े लिखे हो ये जरूरी नहीं है कई ऐसे भी होते हैं जो छोटे-मोटे काम पकड़ लेेते हैं जैसे ऑफिस बॉय, सिक्योरिटी गॉर्ड या फिर किसी दुकान या व्यापारी का पर्सनल नौकर बन जाते हैं। लेकिन ऐसे भी बहुत हैं जो पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी ले लेते हैं लेकिन परिवार से दूरी फिर भी जरूर खलती होगी।
  2. शादीशुदा के साथ जॉबशुदा लोग- बड़े शहरों में नौकरी करते हुए शादी होना या फिर शादी होकर बड़े शहरों में नौकरी मिलना पहला कदम होता है अपने ऊपर से प्रवासी टैग हटाने का। यहां से लोग बहुत मेहनत करना शुरू कर देते हैं सेविंग ज्यादा हो जाती है खर्चें कम हो जाते हैं, फिर एक दिन बीवी को उसी शहर में बुला लेते हैं फिर बच्चे हो जाते हैं फिर अपना घर भी ले लेते हैं। अब तो सब उसी शहर के प्रमाणित निवासी हो जाते हैं। लेकिन ये सब बहुत मुश्किल होता है कई साल की मेहनत और सेविंग के बाद ये उपलब्धी लोगों के हाथ लगती है। महिलाओं को भी शादी के वजह से प्रवास करना पड़ता है लेकिन वो जहां जाती है वहां पति के नाम के साथ उनका नाम जुड़ जाता है तो उन्हें उसी शहर का निवासी माना जाता है।
  3. निवासी फिर भी बड़े शहरों के प्रवासी- कई लोग बड़े शहरों में घर तो ले लते हैं लेकिन फिर भी अपने घरवालों से दूरी जरूर उन्हें खलती है। इसीलिए त्यौहारों पर वो अपने ही शहर जाते हैं अपने माता-पिता के घर, अपने दोस्तों के बीच, रिश्तेदारों के बीच। लेकिन कई ऐसी भी लोग है जो यहां के ही पक्के निवासी हो जाते हैं जिनके अपने बेटा-बेटी और फिर पोता-पोती तक बड़े शहरों में ही पले बढ़े होते हैं। इन लोगों पर एक ठप्पा जरूर रहता है कि ये फलाना जगह के हैं।

अब बाते करते हैं आंकड़ो की तो 2011 की जनगणना के मुताबिक..

  • 45 करोड़ से ज्यादा लोगों ने एक स्थान से दूसरे स्थान के लिए प्रवास किया।
  • करीब 1 करोड़ लोग हर साल कहीं ना कहीं प्रवास करते हैं।

एक वजह इतने बड़े प्रवास के लिए ये भी है कि सरकारें कुछ शहरों के विकास और औद्योगिकीकरण से आगे नहीं बढ़ नहीं पा रही है। हर राज्य में सिर्फ कुछ चुनिंदा शहरों में बड़े उद्योग होते हैं वहीं पर चमक-दमक की ज़िंदगी है। लेकिन कुछ शहर अभी भी काफी पीछे हैं। जहां से लोग अच्छी नौकरी के लिए बड़े और विकसित शहरों की तरफ बढ़ते हैं।

सरकार को एक सीमित क्षेत्र में रोजगार मुहैया कराना चाहिए ताकि एक ही शहर में ना हो तो दो या तीन शहर के अंदर नौकरी मिल जाए ताकी व्यक्ति अपने घर पर ही रहे। किसानों के लिए भी अधिकारियों को तैनात किया जाना चाहिए ताकि नई तकनीक उनको पता लगे क्योंकि किसानों को प्रोत्साहन की बहुत जरूरत है। पढ़े लिखे अधिकारी जब उनको समझाएंगे तो वो शायद उनकी बातों पर अमल करें और इससे भी प्रवास होने पर असर पड़ेगा।

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