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ऑक्सफोर्ड की भी पढ़ाई काम नहीं आई – कैसे एक बुजूर्ग की सोशल मीडिया ने की मदद.. सलाम इंडिया

आज सोशल मीडिया स्पेशल आर्टिकल में बात दिल्ली के एक ऐसे शख्स की, जो अपने ही संतानों की बेरूखी की वजह से सड़क पर आ गए थे। ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई कर चुके थे, बिजनेस भी किया लेकिन जब बुढापा आया तो अकले रह गए। लेकिन कहते हैं जिसका कोई नहीं होता उसका भगवान होता है तो यहां भी भगवान ने एक फरिस्ता भेजा और उसने उनकी मदद तो नहीं की लेकिन फेसबुक पर एक पोस्ट डाला जिसमें राजा सिंह जी की आपबीती थी।

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सोशल मीडिया पर सिर्फ हंसी मजाक और गाली देने का काम ही नहीें होता बल्कि लोगों की मदद भी की जाती है ये बात इस वाकये और ऐसे ही कई और घटनाओं से सामने आती है। तभी तो देखिए अब राजा सिंह जी को दिल्ली के वृद्धाश्रम में जगह मिल गई है। बतौर मीडिया रिपोर्स अब वो दिल्ली के राजेंद्र नगर के वृद्धाश्रम गुरू नानक सुखशाला में रह रहे हैं।

फेसबुक पर राजा सिंह की स्टोरी शेयर करते हुए अविनाश सिंह लिखते हैं कि साठ के दशक में राजा सिंह भारत आए थे अपने भाई के कहने पर, फिर भाई के साथ ही बिजनेस किया। लेकिन उनका बिजनेस नहीं चल पाया उनके दो बच्चे भी हैं जिनके लिए उन्होंने बहुत मेहनत की, लोन लेकर उन्हें विदेश पढ़ने भेजा लेकिन बच्चे एक यूएस में और दूसरा यूके में सेटल हो गया और वहीं की लड़की से शादी कर ली और उन्हें अपने पिता की कोई चिंता नहीं है।

आइए जानते हैं फेसबुक पोस्ट में राजा सिंह फुल्ल जी के बारे में और क्या लिखा है ?

  • ऑक्सफोर्ड के ग्रेजुएट राजा सिंह दिल्ली के कनॉट प्लेस में शिवाजी स्टेडियम के पास वीज़ा सेंटर के बाहर बैठते थे, लोगों के फॉर्म भरकर कुछ रूपये कमा लेते थे जिससे उनका गुज़ारा चलता था। बतौर फेसबुक पोस्ट राजा सिंह जी लोगों को 1 रूपये से 100 रूपये बनाने के बिजनेस आईडिया भी बताते थे।
  • हालांकि उनकी ज़िंदगी बहुत मुश्किल हो गई थी, सुबह रेलवे स्टेशन के पास सोकर उठते थे फिर सीपी के एक शौचालय में जाते थे जहां नहा धोकर फिर चाय पीते थे और कभी पैसे होते थे तो नाश्ता भी कर लेते थे। लेकिन कई दिन ऐसे भी होते थे जब उनको सही से खाना भी नहीं मिलता था।
  • गरीब के साथ खुद्दार भी हैं राजा सिंह। ज़िंदगी भर गुरूद्वारे में सेवा करते रहे। लेकिन वो अब लंगर में खाना खाने नहीं जाते उनके मुताबिक कमाते हैं और उन्हीं पैसों से खाते हैं। लंगर के लिए पहले कुछ दान करना पड़ता है अगर नहीं कर पाते तो उन्हें कोई हक नहीं कि वो लंगर में जाकर खाना खाएं।
  • वो भगवान से एक दुआ मांगते हैं कि उनको कभी भीख नहीं मांगनी पड़े।

अविनाश सिंह ने लिखा कि वो किसी भी मदद लेने से साफ मना कर रहे थे लेकिन खराब होती सेहत के साथ उनका ख्याल रखने की जरूरत है। अविनाश ने फिर सभी लोगों से अपील की वो राजा सिंह जी की मदद करें और उन्होंने अपना नंबर भी पोस्ट में शेयर किया।

अब आगे बढ़ते हैं और एक नया किरदार यहां आता है, सिंह करण साहनी जो राजा सिंह जी तक पहुंचे और उन्हें वृद्धाश्रम तक अपने साथ ले गए वो भी राजा सिंह की अनुमति के बाद।

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आप यहां सुन सके हैं कि दोनों के बीच क्या बात हुई।

साहनी जी ने राजा सिंह जी से पूछा कि उन्होंने कभी मदद क्यों नहीं मांगी किसी से, गुरूद्वारा बंगला साहिब इतनी पास में था। फिर राजा सिंह कहते हैं कि उन्हें कोई जरूरत नहीं है मदद मांगने की वो अपना ध्यान खुद रख सकते हैं लेकिन साहनी जी ने उन्हें बहुत समझाया कि अब उनकी उम्र हो चुकी है और वो अब अपना ख्याल नहीं रख पाएंगे, काम नहीं कर पाएंगे तब जाकर राजा सिंह जी माने।

खैर सोशल मीडिया यहां पर हीरो बनकर निकला। अविनाश सिंह और सिंह करण साहनी जी ने भी हीरो वाला काम किया। इन दो लोगों ने साबित कर दिया कि सोशल मीडिया में कितनी ताकत है कि वो किस तरह किसी की ज़िंदगी बदल सकता है।

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