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जानिए हाथरस के राजा महेंद्र प्रताप के बारे में- जिनके सामने अटल बिहारी वाजपेयी की जमानत जब्त हो गई थी

15-08-1979

देश में कई महान क्रांतिकारी हुए हैं लेकिन इतिहास और सरकारों ने सिर्फ गिने-चुने लोगों को महान माना और उन्हीं के बारे में लोगों को पता भी है। रविवार (29 अप्रैल) को देश के महान क्रांतिकारी राजा महेंद्र प्रताप का 39वां निर्वाण दिवस मनाया गया। राजा महेंद्र इतिहास के पन्नों में खो चुके वो व्यक्ति हैं जिनके बारे में महात्मा गांधी ने अपनी पत्रिका ‘यंग इंडिया’ में लिखा था, “राजा महेंद्र प्रताप महान देशभक्त हैं। देश की भलाई की लिए उन्होंने देश से निर्वासन (अंग्रेजों द्वारा) को चुना। उन्होंने अपनी सारी संपत्ति छोड़ दी, शैक्षिक कार्यों के लिए।”

राजा महेंद्र प्रताप का जन्म 1 दिसंबर 1886 को आज के उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में स्थित मुरसान में हुआ था। वो तत्कालीन हाथरस राज्य के राजा भी थे।

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फोटो साभार- http://rajamahendrapratap.co/

आइए कुछ प्वाइंट्स के जरिए उनके बारें में कुछ जरूरी तथ्य समझते हैं।

  • 1932 में नोबल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किए गए थे। स्वीडन के एन ए निल्सन ने उन्हें नॉमिनेट किया था, जिन्होंने उनकी दानवीरता, देशभक्ति के लिए ये पुरस्कार देने की वकालत की थी। हालांकि 1932 में नोबल पुरस्कारों की घोषणा नहीं की गई थी।
  • 1957 में आज़ादी के दस साल बाद मथुरा (उत्तर प्रदेश) से निर्दलीय चुनाव लड़ा। भारतीय जनसंघ की ओर से उम्मीदवार थे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। लेकिन राजा महेंद्र प्रताप की जीत हुई और अटल जी की जमानत जब्त हो गई थी।
  • विकिपीडिया पर मौजूद जानकारी के मुताबिक राजा साहब ने अलीगढ़ के ‘मोहम्मदन एंग्लो-ओरियंटल स्कूल’ में पढ़ाई की थी, इसी स्कूल को आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है।
  • 1913 में साउथ अफ्रीका में महात्मा गांधी जी के साथ जुड़े। फिर दुनिया भर का दौरा किया जिसमें उन्होंने लोगों को तत्कालीन अविभाजित भारत और अफगानिस्तान में अंग्रेजों के अत्याचारों के बारे में बताया।
  • 1915 में अफगानिस्तान में भारत की प्रोविशनल सरकार की स्थापना की, फिर अफगानिस्तान के दूत बनकर दुनिया भर में घूमे और अंग्रेजों की सच्चाई से दुनिया को अवगत कराया।
  • राजा प्रताप सिंह से रूसी नेता ब्लादिमीर लेनिन काफी प्रभावित थे, उन्होंने राजा साहब को रूस मिलने के लिए भी बुलाया था।
  • देश के बाहर राजा साहब की गतिविधियों के बारे में पता लगने पर भारत की ब्रिटिश सरकार ने उन पर इनाम का ऐलान किया और भारत में उनकी सारी संपत्ति को जब्त कर लिया गया था।
  • जापान में रहते हुए वर्ल्ड फेडरेशन पत्रिका शुरू की और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान पूरी ताकत लगा दी कि किस तरह ब्रिटेन के खिलाफ विदेशी समर्थन का इस्तेमाल हो सके। आखिरी में ब्रिटिश सरकार राजा साहब को लेकर नम्र पड़ ही गई और उन्हें भारत आने की अनुमति दी गई।
  • 1946 में भारत आए और फिर महात्मा गांधी के साथ रहे। आज़ादी के बाद उन्होंने आम आदमी तक सत्ता पहुंचाने की वकालत की और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की।
  • आज़ाद भारत में अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी संघ के अध्यक्ष भी रहे। जाट होने की वजह से आज भी जाट समुदाय में उन्हें काफी माना जाता है। वो अखिल भारतीय जाट महासभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
  • 1979 में उनके निधन के बाद उनके नाम से पोस्टल स्टांप भी जारी किया गया था।
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