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इंदिरा से सीखें मोदी: दुर्गा यूं ही नहीं कहते थे उन्हें

इंदिरा गांधी, यानी कि भारत की सबसे मजबूत प्रधानमंत्री। इंदिरा यानी दुर्गा, मर्दानी, लड़ाका।

इंदिरा की तारीफ उनकी इच्छाशक्ति के लिए की जाती है, बिल्कुल निडर।

पाकिस्तान दो हिस्सों में था, एक पूर्वी और दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान। दुनिया के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि कोई देश दुसरे देश मे जाए, युद्ध करे लेकिन उस देश पर कब्जा करने के लिए नहीं बल्कि उस देश को आज़ादी दिलाने के लिए।

1971 में भारत की सेना पाकिस्तान के अत्याचार झेल रहे पूर्वी बंगाल में न सिर्फ दाखिल हुई बल्कि पूरी पाकिस्तान को भारत के आगे घुटने टेकने पड़ गए और नया देश बना बांग्लादेश। सैम मानिकशॉ को कौन नहीं जानता। तत्कालीन सेनाध्यक्ष हमेशा के लिए अमर हो गए। वहीं, इंदिरा गांधी की शख्शियत और नेतृत्व भी सदा के लिए अमर हो गई।

इंदिरा गांधी की इच्छाशक्ति न होती तो शायद आज भी बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान होता।

अब बात आतंकवाद की, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की शुरुआत इंदिरा गांधी के युग के काफी बाद हुआ। इंदिरा के समय खालिस्तान का आतंकवाद चरम पर था जैसे आज इस्लामिक आतंकवाद है।

पंजाब में अकालियों की सरकार थी जिसके मन मे खालिस्तान के सदस्यों के लिए सॉफ्ट कार्नर था। पंजाब में जड़े जमा चुका खालिस्तान और उसके आतंकियों को धार्मिक सरंक्षण मिल रहा था। खालिस्तान के सरगना जरनैल सिंह भिंडरावाले समेत कई आतंकी ने स्वर्ण मंदिर में पनाह ली हुई थी।

यहां भी इंदिरा की इच्छाशक्ति दिखाई और सेना को स्वर्ण मंदिर को कार्रवाई की अनुमति दी।

1 जून 1984 को ऑपरेशन ब्लू स्टार की शुरुआत हुई और शुरू हुआ भारत में आतंकवाद का खात्मा। सभी आतंकियों को मार गिराया गया और भारत में खालिस्तान का खात्मा हो गया।

लेकिन इंदिरा के साहस के आगे सिख धर्म की भावनाएं ज्यादा प्रबल होती गई और उन्हीं के दो सिख गार्ड्स ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।

लेकिन आज के समय यह सोच भी नहीं सकते कि ऐसा कुछ होगा जो इंदिरा ने करके दिखाया था। सर्जिकल स्ट्राइक में कुछ आतंकियों का खात्मा तो किया गया लेकिन पाकिस्तान स्थित फैक्ट्ररी से लगातार आतंकी पैदा हो रहे हैं। सरकार हाथ पर हाथ रखे बैठी है हालांकि भारत के अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद का खात्मा हुआ है।

भारतीय खुफिया एजेंसियों की सतर्कता से नई सरकार के 4 साल में कोई बड़ी आतंकी घटना देश के संघर्षरत इलाकों को छोड़कर कहीं नहीं हुई है।

वहीं, कश्मीर में भी आतंकवादी संगठनों के तमाम टॉप आतंकियों को सेना ने चुन-चुनकर मार गिराया है। हालांकि सीमा से सटे इलाकों में पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर, उरी में आर्मी कैम्प पर, जम्मू के आर्मी कैम्प पर आतंकी हमले सरकार की सतर्कता पर सवाल भी उठा देते हैं।

आतंकवाद का गढ़ पाकिस्तान में है और अगर इसे खत्म करना है तो पाकिस्तान में घुसकर ही किया जा सकता है। हाफ़िज सईद, अज़हर मसूद जैसे आतंकियों को मारकर ही आतंकवाद खत्म होगा।

PoK पर भी भारत सरकार कुछ ठोस नहीं कर पाई है, भारत के हिस्से को पाकिस्तान के चंगुल से छुड़ा नहीं पाई है।

मोदी जी, इंदिरा जी से सीखिए कुछ।

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