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राहुल गांधी का विदेश की धरती पर भाषण: जनता को क्या ऐसे दिलाएंगे राशन

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, विरासत की कश्ती पर सवार होकर पार्टी अध्यक्ष बने राहुल इस वक्त केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। होना भी चाहिए। परन्तु लगता है वह अपनी पार्टी को नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अनुसरण कर रहे हैं।

जहां तक मुझे समझ आता है, प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे नेता हैं जो विदेश में जाकर अपने विरोधियों की बुराई करके आए लेकिन साथ में भारत की भी।

राहुल गांधी भी भेड़चाल में ऐसा ही कर रहे हैं। विदेश में जाकर भारत सरकार की बुराई करना, देश की स्थिति का मखौल उड़ाना। राहुल शायद समझते हैं यही वोट पाने का रामबाण तरीका है।

राहुल गांधी सिर्फ बोलते हैं। संसद में, रैलियों में, ट्विटर पर और लोगों के बीच। लेकिन राहुल गांधी अगर जनता की मूलभूत दिक्कतों पर भी बोलें वो भी प्रशासनिक स्तर पर तो शायद ज़्यादा अच्छा रहेगा।

राहुल गांधी की पार्टी भले ही 60 साल फ्लॉप रही हो लेकिन वही लोगों को न्याय भी दिला सकते हैं। आज़ादी के 70 साल बाद भी जनता रोटी कपड़ा मकान के लिए जूझ रही है लेकिन राहुल प्रशासनिक स्तर पर इन बातों को उठाएं तो शायद बदलाव आ सकता है।

लेकिन ऐसा इसलिए भी नहीं है क्योंकि भारत में गरीब, लाचार, विकल्पविहीन जनता से हर कोई सत्ता की चाभी पाकर जनता को भूल जाता है। और फिर विपक्ष झूठी संवेदना और खुद को जनता का मसीहा बताकर उसी चाभी को हथियाने की जुगत में लगा रहता जैसे कि राहुल लगे हुए हैं।

जनता को हितैषी नहीं चाहिए बल्कि नेता चाहिए जो उनके लिए काम करे।

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