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श्रेणी: Poetry

Extraordinary Poems of Ordinary Poets

कर्नाटक का नाटक खत्म हो गया: क्योंकि नेता होते ही नौटंकीबाज़ हैं

कर्नाटक का नाटक हो गया खत्म जनता ने भी वादे कर लिए हज़म। एक से बढ़कर एक फेंकी नेताओं ने अपनी मतलब की लपेट ली जनता ने। कर्नाटक का नाटक […]

जन्म लो इश्वर फिर से

द्वापर युग कृष्ण रूप में जन्मे त्रेता में तुम जन्मे बनकर राम पुनः जन्म लो इश्वर फिर से, लेकर कोई नाम धर कर कोई नाम धरती पर महाभारत सा खेल […]

भ्रष्ट मंत्री जी

मंत्री जी हमारे बडे होशियार, पहन कर कुर्ता पजामा और, चेहरे पर लेकर नकली मुस्कान, मांगने चले वोट जनता के पास। जनता के सामने जो नाटक किया, काम तो आना […]

जिन्दगी से मौत तक

मौत का इंतज़ार कल तलक था , ज़िदंगी अब तुझसे नाराज़ नहीं हॅू । छु कर गई जो पवन आज मुझे , कह दो इन फिज़ाओ से मैं नाराज़ नहीं […]